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मरवाही वनमंडल में बाबुओं का साम्राज्य ! भ्रष्टाचार, फर्जी बिलों और अवैध संपत्ति का जंगलराज उजागर…! एसीबी में शिकायत के बावजूद कार्रवाई ठप, डीएफओ का आदेश भी दबा — “शून्य सहनशीलता” नीति पर उठे गंभीर सवाल

मरवाही वनमंडल में बाबुओं का साम्राज्य ! भ्रष्टाचार, फर्जी बिलों और अवैध संपत्ति का जंगलराज उजागर…!

एसीबी में शिकायत के बावजूद कार्रवाई ठप, डीएफओ का आदेश भी दबा — “शून्य सहनशीलता” नीति पर उठे गंभीर सवाल

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गौरेला–पेण्ड्रा–मरवाही।मरवाही वनमंडल में लंबे समय से पदस्थ बाबुओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों ने विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, डीएफओ कार्यालय मरवाही में वर्षों से एक ही शाखा में पदस्थ कर्मचारी पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने, फर्जी बिल और वाउचर के माध्यम से अवैध लेन-देन करने के आरोप सामने आए हैं।

जानकारी के मुताबिक, सहायक ग्रेड-2 भूपेंद्र साहू, जो वर्तमान में कैम्पा शाखा प्रभारी हैं, पिछले आठ से दस वर्षों से एक ही शाखा में जमे हुए हैं। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने फर्मों से सांठगांठ कर टेंडरों में अनियमितता की, फर्जी बिलों के माध्यम से लाखों रुपये का लेन-देन किया और अवैध संपत्ति अर्जित की। बताया जाता है कि उन्होंने मरवाही क्षेत्र में जमीन खरीदी, आलीशान मकान बनवाया और अन्य निवेश भी किए हैं।

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सूत्रों के अनुसार, इनके खिलाफ शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में भी की गई थी, परंतु मामला जांच के बजाय ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

यह भी सामने आया है कि डीएफओ मरवाही द्वारा स्थानांतरण का आदेश जारी किया गया था, लेकिन प्रभावशाली पहुंच और आर्थिक दबाव के चलते आदेश लागू ही नहीं हो पाया।कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि भूपेंद्र साहू ने 30 लाख के कार्य के विरुद्ध 31 लाख का बिल बुक कराया, साथ ही कैम्पा राशि के 32 लाख रुपये “साहिल इंटरप्राइजेस” नामक फर्म को अवैध भुगतान करने का मामला भी उजागर हुआ है। मजदूरी मद की राशि को सामग्री मद में दर्शाकर फर्जी भुगतान करने तथा प्रतिपूर्ति बनाकर राशि अपने निजी खातों में ट्रांसफर करने के प्रमाण भी मिले हैं।

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विभागीय सूत्रों के अनुसार, क्षेत्रीय कर्मचारियों ने बार-बार शिकायतें कीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे उनमें भारी नाराजगी है।

कर्मचारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार पर कार्रवाई न होना राज्य सरकार की “शून्य सहनशीलता” नीति पर प्रश्नचिह्न लगाता है।इसी क्रम में पुरुषोत्तम कश्यप नामक एक अन्य कर्मचारी पर भी पोस्टिंग और ट्रांसफर में आर्थिक लेन-देन के आरोप लगे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि इन कर्मचारियों पर अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण के कारण अब तक कार्रवाई नहीं हो पाई है। यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आने की संभावना है।

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