कस्तूरबा छात्रावास में स्मार्ट क्लासरूम का खेल—69 लाख का भुगतान, शून्य डिलीवरी; अधिकारी बोले ‘पहले कमीशन, फिर फाइल’, DMF के 3 करोड़ भी बंटवारे की लाइन में !

कस्तूरबा छात्रावास में स्मार्ट क्लासरूम का खेल—69 लाख का भुगतान, शून्य डिलीवरी; अधिकारी बोले ‘पहले कमीशन, फिर फाइल’, DMF के 3 करोड़ भी बंटवारे की लाइन में !
जिले में सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक जिले में कलेक्टर के प्रभाव में कई विभाग निर्णय लेने में “कठपुतली” की तरह काम कर रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कस्तूरबा गांधी छात्रावास के लिए कंप्यूटर, प्रोजेक्टर और स्मार्ट क्लासरूम सामग्री की खरीदी के नाम पर 23×3 = 69 लाख रुपए का भुगतान कोरबा के एक ठेकेदार (तिवारी नामक व्यक्ति) को किया गया है, जबकि धरातल पर एक भी कंप्यूटर की डिलीवरी नहीं हुई।अधिकारी के अनुसार फाइल में बिल, प्रमाणपत्र और हस्ताक्षर सभी मौजूद हैं, जिससे कागजों में काम पूरा दिखाया गया है। लेकिन वास्तविक स्थिति में सामान कहीं नहीं मिला। आरोप यह भी है कि ठेकेदार से 10 लाख रुपए का कमीशन पहले ही वसूल लिया गया था।
डीएमएफ फंड में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप !
सूत्रों का दावा है कि मामला केवल कंप्यूटर खरीद तक सीमित नहीं है। डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) की लगभग 3 करोड़ रुपए की राशि भी बंटवारे की प्रक्रिया में शामिल बताई जा रही है। जिले के अंदरूनी अधिकारियों के अनुसार यहाँ हर कार्य के लिए “रेट” फिक्स होता है—
10 फीसदी अतिरिक्त रकम, उसके बाद फाइल मंजूर !
इन आरोपों ने जिले की प्रशासनिक कार्य शैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल उच्च स्तर पर किसी भी तरह की आधिकारिक जाँच की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन मामले को लेकर विभागों के भीतर तीखी चर्चाएँ जारी हैं !















