LIVE UPDATE
झमाझम खबरेंट्रेंडिंगप्रदेशराजनीतीरायपुर

न्याय की भीख मांगता सिस्टम का अधिकारी: बेटे पर हमला, FIR नहीं तहसीलदार आमरण अनशन पर

कोरबा में न्याय व्यवस्था शर्मसार: तहसीलदार को अपने ही बेटे के लिए थाने के सामने बैठना पड़ा आमरण अनशन पर

गनमैन पर मारपीट का आरोप, 48 घंटे बाद भी FIR नहीं, पुलिस पर सत्ता के दबाव में काम करने के गंभीर आरोप

ये खबर भी पढ़ें…
संजीव शुक्ला BEO पर लगे गंभीर आरोपों की जांच शुरू: DEO का आदेश, दो प्राचार्यों को सौंपी जिम्मेदारी”
संजीव शुक्ला BEO पर लगे गंभीर आरोपों की जांच शुरू: DEO का आदेश, दो प्राचार्यों को सौंपी जिम्मेदारी”
April 22, 2026
संजीव शुक्ला BEO पर लगे गंभीर आरोपों की जांच शुरू: DEO का आदेश, दो प्राचार्यों को सौंपी जिम्मेदारी”  गौरेला-पेंड्रा-मरवाही-जिले के...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

सारंगढ़-बिलाईगढ़/कोरबा।छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक तंत्र में गुरुवार की शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब कोरबा में पदस्थ तहसीलदार बंदे राम भगत न्याय की मांग को लेकर सिटी कोतवाली थाना के सामने आमरण अनशन पर बैठ गए। यह दृश्य न केवल चौंकाने वाला था, बल्कि पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला भी था। विडंबना यह कि जो अधिकारी प्रतिदिन आम जनता की समस्याओं का समाधान करता है, उसे अपने ही बेटे के साथ हुई बर्बरता के मामले में न्याय पाने के लिए थाने की चौखट पर अन्न-जल त्याग करना पड़ रहा है।

क्या है पूरा मामला

ये खबर भी पढ़ें…
सचिन तेंदुलकर का बस्तर आगमन बदलते बस्तर की सशक्त पहचान : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय*
सचिन तेंदुलकर का बस्तर आगमन बदलते बस्तर की सशक्त पहचान : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय*
April 22, 2026
*सचिन तेंदुलकर का बस्तर आगमन बदलते बस्तर की सशक्त पहचान : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय* *जनजातीय अंचल में खेलों के...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

मामला 20 जनवरी का बताया जा रहा है। आरोप है कि तहसीलदार बंदे राम भगत के पुत्र राहुल भगत के साथ भारत माता चौक, कोरबा में सारंगढ़-बिलाईगढ़ कलेक्टर के गनमैन हरिशचंद्र गुमान द्वारा गाली-गलौज और मारपीट की गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद इतना बढ़ गया कि गनमैन ने राहुल के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे उनके कान का पर्दा फट गया। पीड़ित को तत्काल चिकित्सा उपचार कराना पड़ा।इस गंभीर घटना की लिखित शिकायत पुलिस को दी गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि 48 घंटे बीत जाने के बावजूद FIR दर्ज नहीं की गई।

पुलिस पर रसूख और दबाव में काम करने का आरोप

ये खबर भी पढ़ें…
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस अध्यक्ष के बयान पर दी कड़ी प्रतिक्रिया : प्रधानमंत्री के प्रति अपमानजनक टिप्पणी को बताया लोकतंत्र पर आघात
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस अध्यक्ष के बयान पर दी कड़ी प्रतिक्रिया : प्रधानमंत्री के प्रति अपमानजनक टिप्पणी को बताया लोकतंत्र पर आघात
April 22, 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस अध्यक्ष के बयान पर दी कड़ी प्रतिक्रिया : प्रधानमंत्री के प्रति अपमानजनक टिप्पणी...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

तहसीलदार बंदे राम भगत का आरोप है कि उन्होंने गुरुवार को दोपहर 3 बजे से देर शाम तक थाने में इंतजार किया, लेकिन पुलिस अधिकारी सिर्फ फाइलें इधर-उधर घुमाते रहे। उन्होंने बताया कि उन्होंने थाना प्रभारी को 8 से 10 बार फोन किया, लेकिन फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा गया। जब एक बार संपर्क हुआ भी, तो वहां से भी केवल टालमटोल और गोलमोल जवाब मिला। जांच अधिकारी से लेकर आरक्षक स्तर तक कोई भी अधिकारी स्पष्ट जवाब देने की स्थिति में नहीं था, जिससे यह संदेह और गहरा गया कि मामला सत्ता और रसूख के दबाव में दबाया जा रहा है।

FIR की मांग पर अन्न-जल त्याग !

पुलिस के इस रवैये से आहत होकर तहसीलदार बंदे राम भगत ने गुरुवार की शाम सिटी कोतवाली के सामने आमरण अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा—

“जब तक मुझे FIR की कॉपी नहीं दी जाती, तब तक मैं अन्न और जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करूंगा।”एक राजपत्रित अधिकारी का इस तरह थाने के सामने बैठना न सिर्फ पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रभावशाली लोगों के सामने कानून किस हद तक बेबस नजर आ रहा है।

पुलिस प्रशासन में मचा हड़कंप !

तहसीलदार के आमरण अनशन पर बैठते ही कोतवाली थाना परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आनन-फानन में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सूचना दी गई। सूत्रों के मुताबिक, मामले को संभालने के लिए उच्च स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। सबसे बड़ा सवाल: आम जनता का क्या?

यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है—

जब एक तहसीलदार के बेटे को न्याय पाने के लिए अनशन करना पड़ रहा है, जब गंभीर चोट के बावजूद FIR दर्ज नहीं होती,

तो आम नागरिकों की सुनवाई पुलिस थानों में किस स्तर पर होती होगी ? क्या कानून सबके लिए बराबर है या फिर वर्दी और रसूख के आगे न्याय भी मौन हो जाता है?

(समाचार लिखे जाने तक तहसीलदार का आमरण अनशन जारी था और FIR दर्ज होने की पुष्टि नहीं हो पाई थी।)

Back to top button
error: Content is protected !!