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मरवाही में शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल: 60–65 किमी दूर “गुरुकुल” से चल रहा बरौर स्कूल ?

मरवाही में शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल: 60–65 किमी दूर “गुरुकुल” से चल रहा बरौर स्कूल ?

जीपीएम_मरवाही– बोर्ड परीक्षाएं सिर पर हैं, मरवाही विकास खंड के हाई स्कूल बरौर में जिम्मेदारी का केंद्र माने जाने वाले प्राचार्य की अनुपस्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि संबंधित “प्राचार्य सुधीर कुमार जैन” का “मुख्यालय” कथित तौर पर 60–65 किलोमीटर दूर किसी गुरुकुल में बताया जा रहा है, और वे वहीं के इर्द-गिर्द अधिक समय बिताते हैं। यदि यह सही है, तो फिर बरौर स्कूल का संचालन आखिर किसके भरोसे ? CGVSK App के नियम क्या सिर्फ कागजों में? शासन ने शिक्षकों और प्राचार्यों के लिए CGVSK App के माध्यम से सुबह आगमन और शाम निर्गमन की ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य की है—ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। तो क्या यह नियम बरौर स्कूल के प्राचार्य पर लागू नहीं होता? यदि लागू है, तो उनकी उपस्थिति किस आधार पर दर्ज हो रही है ? क्या ऐप की मॉनिटरिंग हो रही है, या सिस्टम सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है? बोर्ड परीक्षा नजदीक, नेतृत्व नदारद ?

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बोर्ड परीक्षाओं के दौरान प्राचार्य की भूमिका सबसे अहम होती है—परीक्षा फॉर्म और दस्तावेज़ी प्रक्रिया प्रैक्टिकल और आंतरिक मूल्यांकन विद्यार्थियों का मार्गदर्शन अनुशासन और समन्वय ऐसे संवेदनशील समय में यदि विद्यालय प्रमुख नियमित रूप से उपस्थित न हों, तो यह सीधे-सीधे विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा मामला है।

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अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है—

आखिर स्कूल चला कौन रहा है? 60–65 किमी दूर “मुख्यालय” कैसे ? यदि प्राचार्य का वास्तविक मुख्यालय बरौर स्कूल है, तो 60–65 किलोमीटर दूर किसी अन्य स्थान से दायित्व निभाना नियमों के अनुरूप कैसे माना जाएगा? क्या शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर है कि इतनी दूरी और नियमित अनुपस्थिति पर भी कोई संज्ञान नहीं? या फिर विभागीय संरक्षण प्राप्त है _ जिसकीचर्चा यूं ही नहीं हो रही ?

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वेतन आहरण पर भी सवाल सबसे बड़ा प्रश्न_!

—यदि नियमित उपस्थिति नहीं है, तो वेतन किस आधार पर आहरित हो रहा है? क्या उपस्थिति का सत्यापन होता है ? क्या निरीक्षण रिपोर्ट तैयार होती है?
क्या उच्च अधिकारियों को वास्तविक स्थिति की जानकारी है ?

मामले में जांच की मांग -_ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों पारदर्शिता हेतु मांग है —

CGVSK App की उपस्थिति रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं,..!

विद्यालय निरीक्षण रिपोर्ट जारी हो,
यदि अनियमितता सिद्ध हो तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई हो। शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अब निगाहें शिक्षा विभाग पर टिकी हैं—क्या वह इस मामले में त्वरित जांच कर स्थिति स्पष्ट करेगा, या सवाल यूं ही अनुत्तरित रहेंगे?

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