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राजस्व विभाग पर ACB–EOW का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: पटवारी से RI प्रमोशन में करोड़ों की दलाली की जांच, 25 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

राजस्व विभाग पर ACB–EOW का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: पटवारी से RI प्रमोशन में करोड़ों की दलाली की जांच, 25 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में राजस्व विभाग की गड़बड़ियों पर आज बड़ा प्रहार हुआ है। बुधवार सुबह एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा संभाग में 25 से अधिक ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। यह कार्रवाई बीते एक वर्ष से राजस्व तंत्र में चल रहे कथित भ्रष्टाचार, संदिग्ध पदोन्नति, और पैसों के लेनदेन से जुड़े मामलों की जांच के तहत की गई है। अचानक हुई इस व्यापक कार्रवाई से पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है।

बिलासपुर केंद्र में—एक ही परिवार के 3–4 सदस्य जांच के घेरे में

सूत्रों के अनुसार सबसे अधिक फोकस बिलासपुर संभाग रहा, जहां तड़के कई टीमों ने एक साथ छापे मारे। जांच में एक ऐसा परिवार निशाने पर है जिसके तीन से चार सदस्य कम समय में पटवारी से राजस्व निरीक्षक (RI) पद पर पदोन्नत हुए।इन पर आरोप है कि भारी भरकम राशि देकर ‘स्पेशल प्रमोशन सेटिंग’ की गई। इसी परिवार के ससुराल पक्ष की दो महिला RIs की भी जांच हो रही है। पिछले डेढ़ वर्ष से इन नामों को लेकर ‘आर्थिक समझौते’, ‘पदोन्नति सेटिंग’ और ‘संदिग्ध लेनदेन’ की चर्चाएँ लगातार तैरती रही थीं। शहर के एक विवादित पटवारी का नाम भी अब जांच में सामने आया है।

पिछले शासनकाल की प्रक्रियाओं पर भी नजर 

ACB की शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि पिछले शासनकाल के दौरान पटवारी से RI बनने की प्रक्रिया में कथित आर्थिक गतिविधियाँ खूब सक्रिय थीं। पदोन्नति में कथित रैकेट के काम करने की शिकायतें आने के बाद एसीबी ने पूरे नेटवर्क को चिह्नित कर यह बड़ी कार्रवाई की।

राजधानी से सरगुजा तक छापे—महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त

रायपुर, सरगुजा और अन्य जिलों में एसीबी–EOW ने दो दर्जन से अधिक ठिकानों से, दस्तावेज़,इलेक्ट्रॉनिक डेटा,लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड,ज़ब्त किए हैं।अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच के बाद कई और बड़े नाम सामने आने की पूरी संभावना है। आने वाले दिनों में कार्रवाई का दूसरा चरण और भी व्यापक हो सकता है।

राजस्व ढांचे में बड़े सुधार की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई राजस्व विभाग में लंबे समय से चली आ रही जटिल अनियमितताओं का खुलासा कर सकती है। जांच की दिशा और उसके नतीजे आने वाले समय में राजस्व सिस्टम में बड़े बदलावों की नींव रख सकते हैं।

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