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विश्व कप विजेता खिलाड़ी क्रांति गोंड को आदिवासी शक्ति सेना की ओर से ₹1 लाख की धनराशि से सम्मानित करने का ऐलान

मिथलेश आयम, रायपुर(खबरो का राजा) : भारतीय महिला क्रिकेट टीम की तेज गेंदबाज और आदिवासी समाज की गौरव क्रांति गोंड ने हाल ही में समाप्त हुए महिला क्रिकेट विश्व कप में अपने शानदार प्रदर्शन से न केवल भारत का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे आदिवासी समाज को गर्व से भर दिया है। विश्व कप टूर्नामेंट में क्रांति गोंड ने अपने दमदार प्रदर्शन से विरोधी टीमों के खिलाफ कई निर्णायक विकेट झटके और भारत को विश्व विजेता बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी इस अभूतपूर्व सफलता और समाज के गौरव को देखते हुए आदिवासी शक्ति सेना ने क्रांति गोंड को ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) की धनराशि देकर सम्मानित करने का ऐलान किया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय शमशेर सिंह गोंड ने घोषणा करते हुए कहा कि क्रांति जैसी प्रतिभाशाली बेटियाँ समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की बेटियाँ अब हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं, और क्रांति गोंड ने खेल के क्षेत्र में जो उपलब्धि हासिल की है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का कार्य करेगी। आदिवासी शक्ति सेना के राष्ट्रीय महासचिव इंजीनियर अमन सैनी ने इस फैसले को अत्यंत सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि संगठन सदैव उन प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है जो समाज, राज्य और देश का नाम ऊँचा कर रही हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि समाज की ऐसी बेटियों को पहचान और प्रोत्साहन मिलना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ें।गौरतलब है कि क्रांति गोंड ने बचपन से ही क्रिकेट के प्रति गहरी रुचि दिखाई और सीमित संसाधनों के बावजूद अपने जुनून, मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। आदिवासी शक्ति सेना का यह कदम समाज के युवाओं के लिए प्रेरणादायक साबित होगा, क्योंकि इससे न केवल खेल प्रतिभाओं को सम्मान मिलेगा, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन भी मिलेगा। संगठन का मानना है कि ऐसे प्रयासों से आदिवासी समाज की नई पीढ़ी खेल, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में अपना सर्वोत्तम योगदान दे सकेगी। क्रांति गोंड को आदिवासी समाज की “नई क्रांति” के रूप में देखा जा रहा है, जिनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर अवसर और समर्थन मिले, तो समाज की बेटियाँ विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

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