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उड़ती ज़मीन” का खेल — राजस्व अमले की मिलीभगत से 2 किलोमीटर दूर शासकीय भूमि पर कर दी गई निजी जमीन की स्थापना !

उड़ती ज़मीन” का खेल — राजस्व अमले की मिलीभगत से 2 किलोमीटर दूर शासकीय भूमि पर कर दी गई निजी जमीन की स्थापना !

छत्तीसगढ़:- कोरबा जिले में भू-माफिया, जमीन दलाल, काश्तकार और राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कथित मिलीभगत से ऐसा खेल सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सुनने में अजीब जरूर लगता है, लेकिन शिकायत और सूत्रों के अनुसार यह सच है कि जमीन को उसके मूल स्थान से लगभग 2 किलोमीटर दूर ले जाकर करोड़ों रुपये की बेशकीमती शासकीय भूमि पर “स्थापित” कर दिया गया।

क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला कोरबा तहसील अंतर्गत राजस्व ग्राम दादरखुर्द (पटवारी हल्का पहन-21) के काश्तकार हरिहर राव मगर पिता खेमंत राव मगर, निवासी एनटीपीसी दर्री, द्वारा अपने रिश्तेदार नरोत्तम राव घाड़गे एवं पोड़ीबहार कोरबा के एक कथित भू-माफिया/जमीन दलाल के साथ मिलकर बड़े स्तर पर भूमि हेरफेर किया गया।

शिकायत में बताया गया है कि ग्राम दादरखुर्द की मसाहती पुरानी खसरा नं. 206, रकबा 1.84 एकड़, जो बंदोबस्त के बाद नवीन खसरा नं. 1566, 1570 एवं 1572 में दर्ज हुई, वह भूमि वास्तव में गांव के एक कोने में बोईरमुड़ा खार (कुम्हार पारा) क्षेत्र में स्थित है।

लेकिन आरोप है कि इस भूमि को योजनाबद्ध तरीके से खरमोरा–दादरखुर्द मुख्य मार्ग पर स्थित करोड़ों रुपये की शासकीय भूमि खसरा नं. 273 एवं 274 पर अवैध रूप से स्थापित करवा दिया गया।

कैसे हुआ खेल_______!

शिकायत के अनुसार, यह सारा खेल तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कोरबा गजेंद्र सिंह ठाकुर की कथित सांठगांठ से किया गया।

बताया गया है कि पटवारी जांच प्रतिवेदन स्पष्ट न होने के बावजूद, छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 89 के अंतर्गत राजस्व प्रकरण क्रमांक 58/अ-6-अ/2014-15 में दिनांक 27 अप्रैल 2016 को कथित रूप से मोटी रिश्वत लेकर आदेश पारित कर दिया गया, जिसके आधार पर जमीन को उसके मूल स्थान से हटाकर मुख्य मार्ग की कीमती शासकीय जमीन पर स्थापित कर दिया गया।

जमीन का पुराना इतिहास भी संदिग्ध !

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि यह जमीन पूर्व में हीराबाई पति गोबिंद के नाम दर्ज थी। वर्ष 2000 के दशक में लक्ष्मण राव पिता नारायण राव द्वारा तत्कालीन पटवारी से सांठगांठ कर कथित रूप से फर्जी तरीके से अपने नाम दर्ज करवाई गई।

बाद में बंदोबस्त के दौरान भू-माफिया नरोत्तम राव घाड़गे और उसके साथियों ने अधिकारियों-कर्मचारियों से मिलीभगत कर यह जमीन अपने रिश्तेदार हरिहर राव मगर के नाम पर दर्ज करवा दी।

करोड़ों में बेचने की तैयारी !

सूत्रों के हवाले से यह भी खबर है कि आरोपी पक्ष इस जमीन को करोड़ों रुपये में बेचने का प्रयास कर रहा है। कब्जे को मजबूत करने के लिए आसपास के किसानों से विवाद भी खड़ा किया जा रहा है।

पहले भी सामने आ चुके हैं मामले !

उल्लेखनीय है कि दादरखुर्द के बोईरमुड़ा खार (कुम्हार पारा) स्थित इसी जमीन एवं उससे लगी शासकीय भूमि को भू-माफिया नरोत्तम राव घाड़गे और उसके परिवार द्वारा पोड़ीबहार कोरबा निवासी व्यक्ति को लाखों रुपये में बेजा कब्जा/मालमामय के रूप में बेचने का मामला पहले भी सामने आ चुका है।

इस संबंध में उच्च अधिकारियों से शिकायत के बाद जांच कराई गई थी, जिसमें पटवारी द्वारा जांच प्रतिवेदन सौंप दिया गया है और शीघ्र कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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