
श्रद्धा के साथ होलिका दहन: बुरी शक्तियों के नाश और समृद्धि की कामना
रायपुर- छत्तीसगढ़ होली की रात (होलिका दहन) में गेहूं की बाली, कपूर, सूखा नारियल, काले तिल और लौंग डालने की परंपरा कई जगहों पर शुभ मानी जाती है। इसका धार्मिक और प्रतीकात्मक अर्थ होता है। इस बार आप ये करेंगे तो परंपरा के अनुसार निम्न फल माने जाते हैं:
1. गेहूं की बाली
नई फसल और समृद्धि का प्रतीक।मान्यता है कि इससे अन्न-धन में वृद्धि और घर में बरकत आती है।किसान परिवारों में यह विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
2. कपूर
नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं को दूर करने का प्रतीक।कपूर पूरी तरह जल जाता है, इसलिए इसे अहंकार त्याग और शुद्धि का संकेत माना जाता है।
3. सूखा नारियल
इसे समर्पण और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।होली में चढ़ाने से मनोकामना पूर्ण होने और पारिवारिक सुख की कामना की जाती है।
4. काले तिल
पितृ शांति और बुरी नजर से रक्षा के लिए।मान्यता है कि इससे दोष और कष्ट कम होते हैं।
5. लौंग
सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य के लिए।कई लोग 2 या 5 लौंग डालकर विशेष प्रार्थना करते हैं।
इस बार क्या होगा। ?
धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि आप श्रद्धा और सकारात्मक भावना से ये सब होली में अर्पित करते हैं, तो:घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना पूरी होती है।
नकारात्मकता, रोग और बाधाएं दूर होने का विश्वास है।नई शुरुआत के लिए शुभ संकेत माना जाता है।















