पसान के जंगलों में जिलाजीत का ‘जुआ साम्राज्य’ : गौरेला और स्थानीय गुर्गों का गठजोड़..?

कोरबा/पसान: औद्योगिक नगरी और शांत आदिवासी अंचल के रूप में पहचाना जाने वाला कोरबा जिला इन दिनों अवैध गतिविधियों की गिरफ्त में है। ताजा मामला पसान क्षेत्र के घने जंगलों का है, जहां कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए बड़े पैमाने पर जुए का अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा है।
बाहरी नेटवर्क और स्थानीय संरक्षण :-
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड गौरेला निवासी जिलाजीत को बताया जा रहा है। जिलाजीत ने न केवल पसान के दुर्गम जंगलों को अपना सुरक्षित ठिकाना बनाया है, बल्कि इसमें पसान के ही एक स्थानीय सहयोगी की भूमिका भी संदिग्ध है। यह गठजोड़ साफ इशारा करता है कि बिना स्थानीय संरक्षण और अंदरूनी मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर जुए का फड़ चलना मुमकिन नहीं है।
सामाजिक ताने-बाने पर प्रहार :-
जंगलों की आड़ में फल-फूल रहा यह गोरखधंधा केवल एक कानूनी अपराध नहीं, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक व्यवस्था पर सीधा हमला है:
युवाओं को दलदल में धकेलना: क्षेत्र के गरीब और बेरोजगार युवाओं को जल्द अमीर बनने का लालच देकर इस अवैध धंधे में झोंका जा रहा है।
बढ़ता अपराध ग्राफ: जुए के इन अड्डों के कारण नशा, आपसी विवाद और हिंसा की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
शांति भंग होने का खतरा: आदिवासी अंचल की शांति अब संगठित अपराध के साये में है।
प्रशासन की कार्य पर गंभीर सवाल :-
हैरानी की बात यह है कि वनांचल क्षेत्रों में गश्त का दावा करने वाली पुलिस की नाक के नीचे यह संगठित नेटवर्क कैसे फल-फूल रहा है? गौरेला से आकर अपराधी यहां अपना तंत्र विकसित कर लेते हैं और स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगती, यह स्थिति कानून के इकबाल पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। ”यदि समय रहते इस नेटवर्क को ध्वस्त नहीं किया गया, तो कोरबा का यह शांत इलाका अपराधियों का सुरक्षित गढ़ बन जाएगा। अब केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि धरातल पर कड़े प्रहार की आवश्यकता है।” सवाल अब भी वही है: क्या खाकी का खौफ खत्म हो चुका है, या फिर यह मौन किसी बड़े समझौते का हिस्सा है?















