
शिक्षक विहीनता से जूझ रहा चिल्हनटोला का पूर्व माध्यमिक स्कूल — 2 महीने से बंद पढ़ाई, ग्रामीण परेशान!
मरवाही। विकासखण्ड मरवाही के दूरस्थ आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायत गुल्लीडाड़ के पूर्व माध्यमिक स्कूल चिल्हनटोला में लंबे समय से शिक्षक विहीनता की स्थिति बनी हुई है। युक्तियुक्तकरण होने के बाद भी शिक्षकों की पदस्थापना न होने से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार लगभग दो महीने से स्कूल में एक भी शिक्षक मौजूद नहीं है, जिससे बच्चों की पढ़ाई ठप पड़ी हुई है।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस समस्या की जानकारी कई बार विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को दी है, लेकिन उसके बाद भी विभाग की ओर से कोई अधिकारी या कर्मचारी स्थिति का जायजा लेने नहीं पहुंचा। स्कूल में ताले भले न लगे हों, लेकिन शिक्षक न होने से कक्षाएं चल नहीं पा रही हैं।
छह माही परीक्षा नजदीक, पर अब तक विषयवार तैयारी नहीं— बच्चों के भविष्य पर संकट!
ग्रामीणों ने चिंता जताते हुए बताया कि छह माही परीक्षा करीब है, लेकिन स्कूल में शिक्षक न होने से बच्चों की विषयवार तैयारी नहीं कराई जा सकी है। इससे विद्यार्थियों के भविष्य और उनकी शैक्षणिक प्रगति पर सीधा असर पड़ रहा है। बच्चों को मजबूर होकर स्वयं अध्ययन करने या अन्य विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं, जो उनके स्तर के लिए उपयुक्त नहीं है।
आदेश जारी, फिर भी शिक्षक ने नहीं ज्वाइन किया___आखिर क्यूं.?
सूत्रों के मुताबिक संबंधित शिक्षक के लिए आदेश तो जारी कर दिया गया है, लेकिन शिक्षक अब तक ज्वाइनिंग देने नहीं पहुंचे। इससे यह साफ झलकता है कि विभागीय नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था कितनी कमजोर है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षकों को न कोई डर है, न अनुशासन का पालन, और विभाग भी इस स्थिति पर गंभीर नहीं दिख रहा।
जिला प्रशासन कहता है शिक्षा स्तर सुधारने की बात, लेकिन जमीनी हकीकत में फेल!
एक तरफ जिला प्रशासन और सरकार स्कूल शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने की बात करती है, लेकिन वास्तविकता में चिल्हनटोला जैसे ग्रामीण स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है।
शिक्षक विहीन स्कूल, अनदेखी की शिकार शिकायतें और विभागीय उदासीनता— ये सब शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलते हैं। समाचार लिखते तक शिक्षक ज्वाइन नहीं किया था!















