LIVE UPDATE
आज का राशिफलझमाझम खबरेंदुनियादेशप्रदेशराजनीतीरायपुर

डीईओ ऑफिस में पदोन्नति घोटाला!” नियमों को कुचलकर जूनियर को प्रमोशन, फर्जी डीपीसी पर उठे सवाल… अनुकंपा नियुक्ति के बाद अब पदोन्नति में भी बड़ा खेला!

डीईओ ऑफिस में पदोन्नति घोटाला!”

नियमों को कुचलकर जूनियर को प्रमोशन, फर्जी डीपीसी पर उठे सवाल… अनुकंपा नियुक्ति के बाद अब पदोन्नति में भी बड़ा खेला!

ये खबर भी पढ़ें…
खनिज विभाग की अवैध रेत भंडारण पर बड़ी कार्रवाई, 80 हजार 520 रुपये का जुर्माना
खनिज विभाग की अवैध रेत भंडारण पर बड़ी कार्रवाई, 80 हजार 520 रुपये का जुर्माना
June 9, 2026
खनिज विभाग की अवैध रेत भंडारण पर बड़ी कार्रवाई, 80 हजार 520 रुपये का जुर्माना गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 9 जून 2026/ कलेक्टर...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय में मनमानी, नियमों की खुलेआम अवहेलना और “अपने लोगों को उपकृत” करने का आरोप अब गंभीर प्रशासनिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। पहले अनुकंपा नियुक्ति में कथित फर्जीवाड़े की फाइल दबाने का मामला सामने आया था, अब पदोन्नति प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं और गजट नोटिफिकेशन की अनदेखी का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आरोप है कि डीईओ कार्यालय ने राज्य शासन के स्पष्ट नियमों को दरकिनार कर फर्जी तरीके से विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) गठित की और जूनियर कर्मचारी को लाभ पहुंचाने के लिए पूरा “खेला” कर दिया।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किस अधिकार से डीपीसी में उन लोगों को शामिल किया गया, जिनका नाम शासन की अधिसूचना में ही नहीं था? और जब पदोन्नति के लिए केवल एक ही नाम तय था, तो फिर डीपीसी बुलाने की नौबत क्यों आई?

ये खबर भी पढ़ें…
नए चौकी प्रभारी व्यान नारायण बनाफर ने संभाला बेलगहना चौकी का प्रभार, शांति व्यवस्था को बताया पहली प्राथमिकता
नए चौकी प्रभारी व्यान नारायण बनाफर ने संभाला बेलगहना चौकी का प्रभार, शांति व्यवस्था को बताया पहली प्राथमिकता
June 9, 2026
जीशान अंसारी की रिपोर्ट, बिलासपुर/बेलगहना। बेलगहना चौकी में प्रशासनिक व्यवस्था के तहत नए चौकी प्रभारी के रूप में व्यान नारायण...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

गजट नोटिफिकेशन की उड़ाई धज्जियां

सहायक ग्रेड-02 से सहायक ग्रेड-01 के पद पर पदोन्नति के लिए राज्य शासन ने स्पष्ट नियम निर्धारित किए हैं। शासन के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार डीपीसी में:- अध्यक्ष के रूप में डीपीआई या उनके द्वारा नामांकित अधिकारी, सदस्य के रूप में उप संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय,सदस्य सचिव के रूप में सहायक संचालक स्थापना,को शामिल किया जाना अनिवार्य है।

ये खबर भी पढ़ें…
​नवाडीह स्कूल में अनुदान राशि की बंदरबांट, फर्जी बिलों के सहारे सरकारी खजाने पर डाका!
​नवाडीह स्कूल में अनुदान राशि की बंदरबांट, फर्जी बिलों के सहारे सरकारी खजाने पर डाका!
June 9, 2026
जीशान अंसारी, बेलगहना/​बिलासपुर : ​शिक्षा के मंदिर को संवारने के लिए सरकार जो पैसा भेजती है, उस पर भ्रष्टाचार के...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

लेकिन बिलासपुर डीईओ कार्यालय ने इस प्रक्रिया में कथित तौर पर बड़ा बदलाव करते हुए दो प्राचार्यों को भी डीपीसी में शामिल कर लिया। यही नहीं, जिन कर्मचारी को पदोन्नति दी गई, उसके अनुमोदन में इन दोनों प्राचार्यों के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं। अब सवाल उठ रहा है कि जब शासन ने समिति की संरचना तय कर दी थी, तब अतिरिक्त सदस्यों को शामिल करने का अधिकार किसने दिया? क्या यह पूरी डीपीसी ही अवैध नहीं हो जाती? प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि यह प्रक्रिया भविष्य में कानूनी विवाद का कारण बन सकती है।

“वन मैन प्रमोशन” के लिए बुलाई गई डीपीसी!

मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस पदोन्नति प्रक्रिया के लिए डीपीसी बुलाई गई, उसमें केवल एक ही कर्मचारी का नाम शामिल किया गया। जबकि विभागीय नियमों के अनुसार किसी भी पदोन्नति प्रक्रिया में रिक्त पदों के अनुपात में “एक के बदले तीन” कर्मचारियों के नाम विचारार्थ रखे जाते हैं।

वरिष्ठता सूची, पांच वर्षों की गोपनीय चरित्रावली, संपत्ति विवरण और विभागीय जांच जैसी सभी जानकारियों के आधार पर डीपीसी निर्णय लेती है। यदि किसी कर्मचारी पर जांच लंबित हो तो उसका नाम सीलबंद लिफाफे में रखा जाता है और पद रिक्त छोड़ा जाता है।

लेकिन आरोप है कि बिलासपुर डीईओ कार्यालय ने इनमें से किसी भी नियम का पालन नहीं किया। सीधे मनमाने तरीके से बैठक बुलाई गई और एक ही नाम पर मुहर लगा दी गई। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रमोशन पहले से “फिक्स” था, तो फिर डीपीसी की औपचारिकता क्यों निभाई गई? क्या पूरी प्रक्रिया केवल नियमों का दिखावा भर थी?

वरिष्ठ कर्मचारी को हटाकर जूनियर को प्रमोशन

दस्तावेजों के अनुसार सहायक ग्रेड-02 में सबसे वरिष्ठ कर्मचारी विकास तिवारी बताए जा रहे हैं। उनकी नियुक्ति 26 अक्टूबर 1987 की है और जन्मतिथि 26 नवंबर 1966 है। वहीं जी.एन. द्विवेदी की नियुक्ति भी 26 अक्टूबर 1987 की बताई गई है, लेकिन जन्म वर्ष 1967 होने के कारण वरिष्ठता क्रम में वे विकास तिवारी से नीचे आते हैं

इसके बावजूद सहायक ग्रेड-01 के रिक्त पद पर जी.एन. द्विवेदी को पदोन्नति दे दी गई।बबताया जा रहा है कि यह पद 30 जून 2025 से रिक्त था, लेकिन वरिष्ठ कर्मचारी के रहते जूनियर को प्रमोट करने पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पहले सस्पेंड किया, फिर रास्ता साफ कर दिया”

विकास तिवारी ने संयुक्त संचालक को लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि उन्हें बिना समुचित सुनवाई के निलंबित कर दिया गया। शिकायत के अनुसार 23 मार्च 2026 को उन पर “लंबी अनुपस्थिति” का आरोप लगाकर कार्रवाई कर दी गई, जबकि उन्होंने पहले ही स्वास्थ्य खराब होने की सूचना विभाग को दे दी थी तिवारी का कहना है कि 23 सितंबर 2025 को उन्होंने आवेदन देकर बताया था कि स्वास्थ्य ठीक नहीं है और स्वस्थ होने पर स्थानांतरित स्कूल में कार्यभार ग्रहण करेंगे। इसके बावजूद विभाग ने उनके आवेदन की अनदेखी कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि निलंबन के तुरंत बाद 3 फरवरी 2026 को जी.एन. द्विवेदी को सहायक ग्रेड-01 के पद पर पदोन्नति दे दी गई। यानी पहले वरिष्ठ कर्मचारी को रास्ते से हटाया गया और फिर जूनियर को लाभ पहुंचा दिया गया।

जांच पहले या सजा पहले?”

मामले में एक और बड़ा विरोधाभास सामने आया है। विकास तिवारी का आरोप है कि निलंबन के बाद उनसे आवेदन लिया गया और अगले ही दिन एक वेतन वृद्धि रोकने का आदेश जारी कर दिया गया। जबकि विभागीय जांच पूरी ही नहीं हुई थी ,उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि जांच लंबित थी तो पहले सजा कैसे दे दी गई? और यदि वेतनवृद्धि रोक दी गई थी तो फिर विभागीय जांच की आवश्यकता क्या थी? प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यह प्रक्रिया सेवा नियमों के खिलाफ मानी जा सकती है और यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की नौबत आ सकती है।

अनुकंपा नियुक्ति से लेकर पदोन्नति तक… सवालों में डीईओ ऑफिस…!

बिलासपुर डीईओ कार्यालय पहले से ही अनुकंपा नियुक्ति में कथित फर्जीवाड़े को लेकर विवादों में है। आरोप है कि एक क्लर्क को बचाने के लिए शिकायतों और दस्तावेजों को दबा दिया गया। अब पदोन्नति प्रक्रिया में सामने आई नई गड़बड़ियों ने पूरे कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि कार्यालय में नियम-कायदों से ज्यादा “प्रभाव और पहुंच” काम कर रही है। शासन के आदेशों की खुलेआम अनदेखी कर मनचाहे तरीके से फैसले लिए जा रहे हैं। अब निगाहें संयुक्त संचालक और लोक शिक्षण संचालनालय पर टिकी हैं कि क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!