शिक्षा मंत्री के आह्वान की अनदेखी‘एक दिया विष्णु के नाम’ कार्यक्रम से दूर रहे बीईओ संजीव शुक्ला, मुख्यालय छोड़ बिलासपुर रवाना

“शिक्षा मंत्री के आह्वान की अनदेखी‘एक दिया विष्णु के नाम’ कार्यक्रम से दूर रहे बीईओ संजीव शुक्ला, मुख्यालय छोड़ बिलासपुर रवाना
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही:-शिक्षा विभाग में पदस्थ ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) गौरेला संजीव शुक्ला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, संजीव शुक्ला पर उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना, मनमानी रवैया अपनाने और विभागीय नियमों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

बताया जा रहा है कि प्रभारी बीईओ संजीव शुक्ला पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं, जबकि शासन के नियमों के अनुसार इतनी लंबी अवधि तक एक ही जगह पर पदस्थ रहना अनुचित माना जाता है। इस दौरान उनकी कार्यशैली को लेकर बार-बार सवाल उठे हैं। कहा जा रहा है कि वे विभागीय बैठकों, योजनाओं और कार्यक्रमों से लगातार दूरी बनाए रखते हैं।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि उनके रवैये से विभागीय छवि पर नकारात्मक असर पड़ा है। उच्चाधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद वे मनमाने ढंग से कार्य करते हैं और अपने कर्तव्यों से बचते हैं।
ताजा मामला दीपावली पर्व से जुड़ा है, जब शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के आह्वान पर पूरे प्रदेश में ‘एक दिया विष्णु के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिले के सभी विद्यालयों में यह कार्यक्रम उत्साहपूर्वक मनाया गया — शिक्षक, छात्र और अधिकारी इसमें शामिल हुए — लेकिन बीईओ संजीव शुक्ला न केवल अनुपस्थित रहे बल्कि शुक्रवार को ही मुख्यालय छोड़ अपने गृह नगर बिलासपुर रवाना हो गए। उनके इस व्यवहार से विभागीय स्तर पर नाराजगी व्याप्त है।
सूत्रों बताते हैं कि , शुक्ला का मूल पद व्याख्याता (एलबी) है और वे वर्तमान में प्रभारी बीईओ गौरेला के रूप में कार्यरत हैं। अब विभाग इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेकर जांच और संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर रहा है।
गौरतलब है कि हाल ही में जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने बीईओ कार्यालय गौरेला का औचक निरीक्षण किया था, जिसमें भी प्रभारी बीईओ संजीव शुक्ला अनुपस्थित पाए गए थे। इस लगातार गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने विभाग में असंतोष बढ़ा दिया है।
शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि संजीव शुक्ला की कार्यशैली लंबे समय से विभाग के लिए सिरदर्द बनी हुई है। उनकी निष्क्रियता और उदासीनता के चलते कई योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विभाग इस पूरे मामले में कब और क्या कदम उठाता है।















