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नदी पर अवैध कब्जा हटाने की मांग — ग्राम करहीकछार के ग्रामीणों ने कलेक्टर से की शिकायत

जीशान अंसारी की रिपोर्ट, बिलासपुर।(खबरो का राजा) : जिला बिलासपुर के बेलगहना तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत करहीकछार के ग्रामीणों ने नदी की भूमि पर हो रहे अवैध कब्जे के खिलाफ जिला कलेक्टर से लिखित शिकायत की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कब्जा न केवल सरकारी भूमि पर है बल्कि इससे गांव का आवागमन भी प्रभावित हो रहा है। शिकायत मिलने के बाद अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।ग्रामीणों द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, ग्राम करहीकछार, पटवारी हल्का नंबर 14, राजस्व निरीक्षक मंडल बेलगहना के खसरा नंबर 204/1 की भूमि, जो कि लगभग 7 एकड़ क्षेत्रफल में है, उस पर फूलचंद निषाद द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कब्जाधारी ने इस भूमि पर अपने निजी उपयोग के लिए निर्माण कार्य कर लिया है और नदी से आने-जाने वाले रास्तों को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है।ग्रामीणों ने बताया कि यह रास्ता वर्षों से पूरे गांव के लोगों के आवागमन का प्रमुख मार्ग रहा है, लेकिन अब उस पर अवरोध खड़ा कर दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कब्जाधारी ने स्थानीय बिजली विभाग से मिलीभगत कर नदी क्षेत्र में अवैध रूप से बिजली कनेक्शन भी करा लिया है। इस अवैध कब्जे का विरोध करने पर ग्रामीणों के साथ बहसबाजी और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जब उन्होंने अवैध कब्जे का विरोध किया तो फूलचंद निषाद ने उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकी तक दे डाली। ग्रामीणों ने बताया कि आरोपित व्यक्ति अपने परिजनों को भी विवाद के दौरान खड़ा कर देता है ताकि कोई उसका विरोध न कर सके।इस मामले में ग्रामीण किना, जमील खान, सुलेमान खान, हसीना, याकूब, यासीन, प्रभास कुमार, सतीश प्रजापति, देवांश कुमार, सुनीता जायसवाल सहित दर्जनों लोगों ने सामूहिक रूप से कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे सामूहिक धरना और आंदोलन करने को विवश होंगे।ग्रामीणों की शिकायत पर अब प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह मामले की निष्पक्ष जांच कर नदी की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराए।ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन जल्द ही पटवारी, तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक की टीम गठित कर मौके का निरीक्षण करवाएगा और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।अब देखने वाली बात होगी कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी प्राथमिकता से लेता है और क्या नदी की भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाता है या नहीं।

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