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बजट में कर्मचारियों के लिए मेडिकल कैशलेस सुविधा की घोषणा, बहुप्रतीक्षित मांग पूरी होने पर मुख्यमंत्री का आभार – आलोक शुक्ला

बजट में कर्मचारियों के लिए मेडिकल कैशलेस सुविधा की घोषणा, बहुप्रतीक्षित मांग पूरी होने पर मुख्यमंत्री का आभार – आलोक शुक्ला

रायपुर। प्रदेश के कर्मचारियों के लिए बहुप्रतीक्षित मेडिकल कैशलेस सुविधा की घोषणा बजट में किए जाने के बाद कर्मचारियों में उत्साह और संतोष का माहौल है। इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए कर्मचारी संगठनों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। कर्मचारी नेता आलोक शुक्ला ने बयान जारी कर कहा कि लंबे समय से प्रदेश के शासकीय कर्मचारी एवं उनके परिजन गंभीर बीमारी की स्थिति में आर्थिक दबाव का सामना कर रहे थे। कई बार उपचार के लिए पहले स्वयं भुगतान करना पड़ता था और बाद में प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया जटिल व समयसाध्य होती थी। कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू होने से अब कर्मचारियों को सूचीबद्ध अस्पतालों में बिना अग्रिम भुगतान के उपचार मिल सकेगा, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल कर्मचारियों के स्वास्थ्य सुरक्षा कवच को मजबूत करेगा, बल्कि आपात स्थिति में समय पर इलाज सुनिश्चित करने में भी सहायक होगा। विशेष रूप से मध्यम और निम्न आय वर्ग के कर्मचारियों के लिए यह व्यवस्था जीवनदायिनी साबित होगी।

आलोक शुक्ला ने बताया कि कर्मचारी संगठनों द्वारा पिछले कई वर्षों से मेडिकल कैशलेस व्यवस्था लागू करने की मांग की जा रही थी। विभिन्न ज्ञापनों, बैठकों और संवाद के माध्यम से इस मुद्दे को सरकार के समक्ष रखा गया था। बजट में इस घोषणा से यह स्पष्ट हुआ है कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है।

उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ-साथ वित्त विभाग एवं संबंधित अधिकारियों का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस निर्णय से प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। कर्मचारी संगठनों ने अपेक्षा जताई है कि योजना के क्रियान्वयन के लिए शीघ्र दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, अस्पतालों की सूची पारदर्शी तरीके से तैयार की जाए तथा हेल्पलाइन एवं मॉनिटरिंग व्यवस्था भी सुदृढ़ की जाए, ताकि योजना का लाभ बिना किसी बाधा के कर्मचारियों तक पहुंच सके।

प्रदेश के विभिन्न जिलों में कर्मचारियों द्वारा इस घोषणा का स्वागत करते हुए इसे “ऐतिहासिक कदम” बताया गया है। कर्मचारियों का मानना है कि यह निर्णय उनके स्वास्थ्य अधिकार को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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