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रिलीव होने के बाद भी पुरानी संस्था से वेतन आहरित! मरवाही शिक्षा विभाग में बड़ा वित्तीय खेल?”

“रिलीव होने के बाद भी पुरानी संस्था से वेतन आहरित! मरवाही शिक्षा विभाग में बड़ा वित्तीय खेल?”

“रिलीव भी हुए, BEO भी बन गए… फिर पुराने स्कूल से कैसे निकल गई सैलरी?”

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मरवाही में वेतन भुगतान को लेकर उठे बड़े सवाल, शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप

मरवाही। विकासखंड मरवाही में पदस्थ वर्तमान बीईओ संजय वर्मा को लेकर शिक्षा विभाग के भीतर अब वेतन भुगतान और प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। मामला इस बात को लेकर गरमा गया है कि जब वे अपनी पूर्व संस्था “सिवनी DDO” से विधिवत रिलीव हो चुके थे और शासन के आदेश पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के पद पर कार्यभार भी ग्रहण कर चुके थे, तब आखिर उनकी सैलरी पुराने स्कूल संस्था से कैसे और किस आधार पर आहरित की गई?

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सूत्रों के अनुसार शासन के वित्तीय और प्रशासनिक नियम स्पष्ट तौर पर कहते हैं कि किसी अधिकारी या कर्मचारी के नई पदस्थापना पर ज्वाइन करते ही उसका वेतन संबंधित नवीन कार्यालय अथवा नई DDO संस्था से आहरित होना चाहिए। ऐसे में यदि पूर्व संस्था से लगातार वेतन निकाला गया, तो यह केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि वित्तीय प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिन्ह माना जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि बीते लगभग 6 माह के दौरान आखिर पूर्व संस्था में ऐसा कौन सा कार्य संपादित किया गया, जिसके आधार पर वहां से वेतन जारी हुआ? जब अधिकारी नई जिम्मेदारी संभाल चुके थे, तब पुरानी संस्था से भुगतान होना प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है।

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शिक्षा विभाग के भीतर चर्चा इस बात को लेकर भी तेज है कि जहां एक ओर कई शिक्षकों पर 10 मिनट देरी से पहुंचने पर वेतन काटने तक की कार्रवाई की जाती है, वहीं दूसरी ओर एक अधिकारी के मामले में पुराने संस्थान से वेतन आहरण कैसे होता रहा? क्या यह सिर्फ लापरवाही है, सिस्टम की खामी है, या फिर नियमों की अनदेखी कर किसी स्तर पर संरक्षण दिया गया?

अब सवाल केवल वेतन का नहीं, बल्कि जवाबदेही का भी बन गया है। यदि अधिकारी रिलीव हो चुके थे, तो पुराने DDO ने किस आदेश या दस्तावेज के आधार पर वेतन बिल पारित किया? क्या ट्रेजरी स्तर पर भी इसकी जांच नहीं हुई? और यदि हुई, तो फिर भुगतान कैसे स्वीकृत हुआ?

मामले को लेकर विभागीय गलियारों में चर्चा है कि यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होती है तो कई प्रशासनिक परतें खुल सकती हैं। फिलहाल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और वित्तीय अनुशासन दोनों सवालों के घेरे में हैं।

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