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53.44 लाख की 2 KM सड़क बनते ही उखड़ी! PMGSY में खुला भ्रष्टाचार? जिम्मेदार मौन”

“53.44 लाख की 2 KM सड़क बनते ही उखड़ी! PMGSY में खुला भ्रष्टाचार? जिम्मेदार मौन”

गौरेला पेंड्रा मरवाही – प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बेंदरचूआ–अमारु से पीथमपुर तक निर्मित 2 किलोमीटर सड़क निर्माण अब सवालों के घेरे में आ गया है। लगभग 53.44 लाख रुपये की लागत से तैयार यह सड़क बनते ही उखड़ने लगी है, जिससे न सिर्फ निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, बल्कि पूरे प्रोजेक्ट की पारदर्शिता पर भी संदेह गहराता जा रहा है।

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स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सड़क का निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ ही समय बाद इसकी ऊपरी डामर परत जगह-जगह से उखड़ने लगी। कई स्थानों पर गिट्टी खुलकर बाहर आ गई है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि निर्माण में या तो घटिया सामग्री का उपयोग किया गया या फिर मानकों के अनुरूप तकनीकी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सड़क का कार्य पूर्णता दिनांक स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या निर्माण कार्य वास्तव में पूरा हुआ था या कागजों में ही पूर्ण दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया। यह स्थिति “कागजों में काम और जमीन पर घोटाला” जैसी आशंकाओं को बल देती है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि निर्माण के दौरान न तो पर्याप्त निगरानी की गई और न ही गुणवत्ता की जांच पारदर्शी तरीके से हुई। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या जिम्मेदार इंजीनियरों ने मौके पर नियमित निरीक्षण किया था, या केवल औपचारिकता निभाई गई। यदि निरीक्षण हुआ, तो सड़क की यह हालत क्यों है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डामर (बिटुमेन) की गुणवत्ता, उसकी मोटाई और मिश्रण अनुपात मानकों के अनुसार होता, तो सड़क इतनी जल्दी खराब नहीं होती। ऐसे में यह संदेह और गहरा जाता है कि कहीं निर्माण में गुणवत्ता से समझौता कर ठेकेदार को अनुचित लाभ तो नहीं पहुंचाया गया।
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि जब करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये की सार्वजनिक राशि इस परियोजना में खर्च की गई, तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा? क्या विभागीय अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे रहेंगे या फिर किसी प्रकार की जांच शुरू की जाएगी?
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता या भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और सरकारी धन की वसूली भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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