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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में बवाल,“मंत्री का आदमी हूं” कहकर दबाव? कमीशन मांगने के आरोप पर घिरा इंजीनियर अंकित जैन…..!

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में बवाल,“मंत्री का आदमी हूं” कहकर दबाव? कमीशन मांगने के आरोप पर घिरा इंजीनियर अंकित जैन…..!

मरवाही (छत्तीसगढ़) – जनपद पंचायत मरवाही में पदस्थ एक इंजीनियर के अटैचमेंट आदेश को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलकों में भारी हलचल मच गई है। सरपंच संघ, जनपद पंचायत मरवाही ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।


संघ के अध्यक्ष तपेश्वर सिंह के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन (पत्र क्रमांक 36, दिनांक 25 जनवरी 2026) में स्पष्ट कहा गया है कि इंजीनियर अंकित जैन को उनके मूल पदस्थापना स्थल जनपद पंचायत पेंड्रा से मरवाही अटैच किया गया है, जिसे तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।


जनप्रतिनिधियों के सम्मान पर चोट?

ज्ञापन में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि संबंधित इंजीनियर का व्यवहार जनप्रतिनिधियों, विशेषकर आदिवासी एवं महिला सरपंचों के प्रति अपमानजनक और अभद्र है।
सरपंच संघ का कहना है कि “एक शासकीय अधिकारी द्वारा इस प्रकार की कार्यशैली न केवल जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था का भी अपमान है।” संघ ने आरोप लगाया है कि बैठकों और कार्यस्थलों पर बोलचाल का तरीका असंतोषजनक है, जिससे जनप्रतिनिधियों की गरिमा को ठेस पहुंच रही है।

कमीशनखोरी और भुगतान रोकने के आरोप…!

मामला केवल व्यवहार तक सीमित नहीं है। ज्ञापन में यह भी आरोप है कि विकास कार्यों के मूल्यांकन में जानबूझकर विलंब किया जाता है और कथित रूप से कमीशन की मांग की जाती है।
सरपंचों का कहना है कि जब तक कथित “लेन-देन” पूरा नहीं होता, तब तक कार्यों में खामियां निकालकर भुगतान रोक दिया जाता है। इससे विकास कार्य बाधित हो रहे हैं और ग्राम पंचायतों की योजनाएं ठप पड़ने की स्थिति में हैं।
सामाजिक और आर्थिक दबाव में सरपंच
भुगतान में देरी के कारण दुकानदारों और ठेकेदारों का पैसा अटक गया है। परिणामस्वरूप सरपंचों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। संघ का दावा है कि कई सरपंच सामाजिक अपमान और विवाद की आशंका से जूझ रहे हैं।
“विकास कार्य कराना हमारी जिम्मेदारी है, लेकिन भुगतान अटकने से हमें ही कटघरे में खड़ा किया जा रहा है,” एक सरपंच ने नाराजगी जताई।
एक सप्ताह की अल्टीमेटम सरपंच संघ ने कलेक्टर को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर इंजीनियर को मरवाही से हटाकर उनके मूल पदस्थापना स्थल भेजने की कार्रवाई नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। संघ ने कहा है कि वे सड़क पर उतरने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

प्रशासन की चुप्पी, बढ़ती सियासी गर्मी…!

इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह से जनप्रतिनिधियों का आक्रोश सामने आया है, उससे स्पष्ट है कि मामला तूल पकड़ सकता है।
अब सबकी निगाहें कलेक्टर कार्यालय के निर्णय पर टिकी हैं—क्या आदेश निरस्त होगा या फिर आंदोलन की आग और भड़केगी?

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