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शिक्षकों की लापरवाही से वनांचल के बच्चों की पढ़ाई चौपट – समय पर नहीं पहुंच रहे शिक्षक, निलंबन की मांग….!!

शिक्षकों की लापरवाही से वनांचल के बच्चों की पढ़ाई चौपट – समय पर नहीं पहुंच रहे शिक्षक, निलंबन की मांग….!!

जीशान अंसारी की रिपोर्ट,

बिलासपुर। जिले के कोटा विकासखण्ड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला घोबघट संकुल केंद्र छतौना में शिक्षकों की मनमानी लगातार सामने आ रही है। विद्यालय में समय पर शिक्षक नहीं पहुंच रहे हैं, जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। स्थिति यह है कि कई बार बिना शिक्षक के ही बच्चे राष्ट्रगान करते नजर आते हैं। यह दृश्य अपने आप में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है।

सरकार शिक्षा को लेकर सजग है और कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए प्रयासरत है। बावजूद इसके, ब्लॉक क्षेत्र में कई विद्यालयों में शिक्षक समय पर उपस्थिति नहीं दर्ज करा रहे हैं। शनिवार को स्कूल का समय सुबह 7 बजे तय है, जबकि शिक्षा विभाग ने पूर्व में 10 बजे से 4 बजे तक का आदेश जारी किया था। इसके बाद भी अधिकांश अध्यापक समय पर स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं, जो बेहद शर्मनाक है।

मॉनिटरिंग के अभाव में बढ़ रही लापरवाही

वनांचल क्षेत्र होने के कारण उच्च अधिकारियों द्वारा यहां सही ढंग से मॉनीटरिंग नहीं की जाती। परिणामस्वरूप शिक्षकों की मनमानी और लापरवाही बढ़ती जा रही है। शिक्षक तो नियमित वेतन प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों को उठाना पड़ता है, जिन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही।

बच्चों के भविष्य से खिलवाड़

लापरवाह शिक्षकों की वजह से वनांचल क्षेत्र के बच्चों का शैक्षणिक विकास प्रभावित हो रहा है। इससे न केवल बच्चों का भविष्य दांव पर है, बल्कि उनमें यह गलत धारणा भी विकसित हो सकती है कि देर से आना या अनुपस्थित रहना स्वीकार्य है। आगे चलकर इसका नकारात्मक असर उनके कार्य-नैतिकता और रोजगार के अवसरों पर पड़ सकता है।

सूत्रों के अनुसार, कई जगहों पर शिक्षकों की आपसी मिलीभगत भी देखने को मिल रही है। कुछ ही शिक्षक नियमित रूप से स्कूल आते हैं, जबकि बाकी घर बैठे वेतन उठाते हैं। इससे विद्यालय संचालन की स्थिति और भी खराब होती जा रही है।

कार्रवाई की मांग

शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों का कहना है कि ऐसे लापरवाह शिक्षकों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। बच्चों के भविष्य से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। सरकार की नीतियां और योजनाएं तभी सफल हो सकती हैं, जब जमीनी स्तर पर शिक्षक अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाएं।

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