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75 लाख के विवाह भवन के सामने 4.29 करोड़ की नई इमारत, भूमि आबंटन प्रक्रिया पर चुप्पी से पेंड्रा में बढ़ता जनाक्रोश

75 लाख के विवाह भवन के सामने 4.29 करोड़ की नई इमारत, भूमि आबंटन प्रक्रिया पर चुप्पी से पेंड्रा में बढ़ता जनाक्रोश

पेंड्रा। नगर पालिका परिषद पेंड्रा एक बार फिर विवादों के घेरे में है। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सर्व समाज मांगलिक विवाह भवन के लिए कलेक्टर कार्यालय द्वारा खसरा नंबर 2379, 2370 एवं 2372 में से कुल 0.75 एकड़ भूमि आबंटित की गई है। इसी भूमि पर लगभग 75 लाख रुपये की लागत से विवाह भवन का निर्माण कार्य जारी है। भवन के सामने की भूमि पंडाल एवं पार्किंग के लिए आरक्षित रखी गई थी ताकि सामाजिक कार्यक्रमों में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
लेकिन अब आरोप है कि वर्तमान मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) द्वारा विवाह भवन के ठीक सामने नियमों को दरकिनार कर “नालंदा परिसर” (लाइब्रेरी) का निर्माण प्रारंभ करा दिया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि नालंदा परिसर के लिए आज तक शासन द्वारा विधिवत भूमि आबंटन नहीं किया गया है। बिना भूमि आबंटन किसी भी शासकीय निर्माण कार्य की शुरुआत नियम विरुद्ध मानी जाती है। इसके बावजूद 4.29 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना का काम शुरू कर देना प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

सामाजिक हितों से खिलवाड़?

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि विवाह भवन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। निजी मैरिज गार्डन और भवनों में होने वाले भारी खर्च से लोगों को मुक्ति मिलेगी। ऐसे में भवन के सामने की आरक्षित भूमि पर अन्य निर्माण कर देना सीधे-सीधे सामाजिक हितों से खिलवाड़ है।
लोगों का तर्क है कि यदि विवाह भवन के सामने लाइब्रेरी बना दी जाएगी तो पंडाल और वाहन पार्किंग की व्यवस्था कहां होगी? शादी-विवाह के दौरान बैंड-बाजा और डीजे की आवाज के बीच लाइब्रेरी में पढ़ाई कैसे संभव होगी? क्या इस तरह की योजना व्यावहारिक और दूरदर्शी कही जा सकती है?


मंत्री और कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग
भाजपा और कांग्रेस पार्षदों सहित नगरवासियों ने संयुक्त रूप से नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव एवं जिला कलेक्टर को आवेदन सौंपकर निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उनका सुझाव है कि नालंदा परिसर का निर्माण कॉलेज परिसर पेंड्रा या लटकोनी मार्ग स्थित नगर पंचायत की भूमि पर कराया जाए। वहां लगभग 2000 छात्र अध्ययनरत हैं, जिससे लाइब्रेरी का सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा और शैक्षणिक वातावरण भी अनुकूल रहेगा।


बड़े प्रोजेक्ट के लिए बड़े कैंपस की जरूरत
4.29 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नालंदा परिसर के लिए पर्याप्त एवं शांत (साइलेंट जोन) क्षेत्र आवश्यक है। विवाह भवन के सामने सीमित स्थान पर निर्माण करना न तो व्यावहारिक है और न ही दीर्घकालिक दृष्टि से उचित। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि परियोजना इतनी बड़ी है तो उसके अनुरूप विस्तृत परिसर की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की अनदेखी
पेंड्रा नगर में आज तक ऑटो स्टैंड, पिकअप स्टैंड एवं अन्य सार्वजनिक आयोजनों के लिए पृथक भूमि आबंटन की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है। ऐसे में पहले से आरक्षित सामाजिक उपयोग की भूमि पर नया निर्माण कराना प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है। नगर प्रशासन और जिला प्रशासन की चुप्पी से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

बढ़ सकता है आंदोलन

नगरवासियों ने स्पष्ट किया है कि विवाह भवन की भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या नियमविरुद्ध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो जनआंदोलन की चेतावनी भी दी जा रही है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन और शासन स्तर पर इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।

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