धान खरीदी में संगठित लूट: 919 क्विंटल धान गायब, 28 लाख का गबन—समिति प्रबंधक, अध्यक्ष समेत तीन पर FIR

कागजों में खरीदी, हकीकत में घोटाला: 919 क्विंटल धान गायब कर 28 लाख डकारे, समिति प्रबंधक पर गिरी गाज
बिलासपुर, 3 अप्रैल 2026।समर्थन मूल्य पर धान खरीदी जैसे संवेदनशील सिस्टम में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। मस्तूरी थाना क्षेत्र के गतौरा स्थित सेवा सहकारी समिति मर्यादित के धान खरीदी केंद्र में लाखों रुपए के गबन का मामला उजागर हुआ है। जांच में 919.96 क्विंटल धान कम पाए जाने के बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए समिति प्रबंधक, अध्यक्ष और कंप्यूटर ऑपरेटर को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है और मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।

जांच में सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा
पूरा मामला तब सामने आया जब जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, मस्तूरी ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि गतौरा धान खरीदी केंद्र के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए सरकारी धान का गबन किया है।

शिकायत के आधार पर गठित संयुक्त जांच दल ने जब भौतिक सत्यापन किया, तो रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर मिला। 919.96 क्विंटल धान केंद्र में कम पाया गया, जिसकी कुल कीमत 28 लाख 51 हजार रुपए आंकी गई।
नियमों को ताक पर रखकर किया गया खेल

जांच में स्पष्ट हुआ कि धान खरीदी प्रक्रिया के दौरान शासन द्वारा निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई। आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से रिकॉर्ड में हेरफेर कर धान का गबन किया, जिससे शासन को लाखों रुपए की सीधी आर्थिक क्षति पहुंची।
इन पर गिरी गाज, तीन गिरफ्तार
मामले में जिन प्रमुख आरोपियों की भूमिका सामने आई, उनमें—
संस्था प्रबंधक: कोमल प्रसाद चंद्रकार,समिति अध्यक्ष: राजेन्द्र राठौर,कंप्यूटर ऑपरेटर: हुलेश्वर धीरही,धान खरीदी प्रभारी: लव कुमार यादव (जांच में नाम)
पुलिस ने तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने गबन करना स्वीकार भी कर लिया, जिसके बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पूरे सिस्टम पर उठे सवाल,इतने बड़े पैमाने पर धान गायब होने के बाद अब पूरी खरीदी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या बिना मिलीभगत इतना बड़ा घोटाला संभव है?निगरानी और ऑडिट सिस्टम कहां फेल हुआ?क्या अन्य समितियों में भी इसी तरह का खेल चल रहा है?यह मामला केवल एक केंद्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुलिस जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद,पुलिस इस मामले को आर्थिक अपराध मानते हुए हर एंगल से जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं और कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।















