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प्रदेशव्यापी आंदोलन की गूंज: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में तहसीलदार और नायब तहसीलदार धरने पर बैठे, कामकाज ठप

प्रदेशव्यापी आंदोलन की गूंज: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में तहसीलदार और नायब तहसीलदार धरने पर बैठे, कामकाज ठप

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही:छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के बैनर तले जिले के तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर तीन दिवसीय धरना शुरू कर दिया है। यह धरना लाल डाक बंगला स्थित स्थल पर आयोजित किया गया है, जिससे जिले के समस्त तहसील कार्यालयों का कार्य पूरी तरह ठप हो गया है। आम जनता, किसान, छात्र और अभिभावकों को जरूरी दस्तावेजों के लिए भटकना पड़ रहा है।

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तहसीलदार का बयान: “हम व्यवस्था के आधार स्तंभ हैं, पर हमें ही मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है”

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धरना स्थल पर उपस्थित तहसीलदार शेषनारायण जायसवाल ने मीडिया से चर्चा में कहा –

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“हम राजस्व विभाग के प्रथम पंक्ति के अधिकारी हैं, लेकिन आज भी हमें न तो पर्याप्त सुरक्षा मिल रही है, न ही पर्याप्त संसाधन।। हम सिर्फ अपने लिए नहीं, पूरे राजस्व तंत्र की मजबूती के लिए खड़े हैं। हमारी 17 सूत्रीय मांगों में कर्मचारियों की कमी दूर करने, जजेस प्रोटेक्शन एक्ट के सख्त पालन, कार्यालयों में सुरक्षा गार्ड और सीसीटीवी कैमरे जैसी सुविधाएं, पारदर्शी पदस्थापन नीति, और समयबद्ध पदोन्नति की मांग शामिल हैं।

उन्होंने आगे कहा –

> “हमने पहले भी शासन को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। यह आंदोलन कोई हठधर्मिता नहीं है, बल्कि सिस्टम को बचाने की एक जिम्मेदार कोशिश है। अगर इस बार भी सरकार ने मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो हमें विवश होकर अनिश्चितकालीन आंदोलन करना पड़ेगा।”

किसान और छात्र परेशान

धरने के चलते तहसील कार्यालयों में दस्तावेज संबंधी सभी कार्य ठप हैं। पेंड्रा तहसील पहुंचे किसानों ने बताया कि वे भूमि दस्तावेज, नक्शा, खसरा और प्रमाण पत्र बनवाने आए थे, लेकिन काम बंद होने से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।

एक किसान ने कहा –

> “धान बेचने के लिए गिरदावरी की कॉपी चाहिए थी, लेकिन बताया गया कि साहब धरने पर हैं। हम कब तक रोज ऑफिस आते रहेंगे?”

वहीं छात्रों के जाति, निवास, आय प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक कार्य भी रुक गए हैं, जिससे शैक्षणिक प्रवेश और छात्रवृत्ति जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।

सरकार की चुप्पी पर सवाल

संघ ने साफ कहा कि यह आंदोलन न केवल व्यक्तिगत हितों के लिए है, बल्कि राजस्व तंत्र को कुशल और सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक है। यदि सरकार जल्द ही सकारात्मक पहल नहीं करती है, तो यह आंदोलन और तीव्र रूप ले सकता है।

संभावित असर और चेतावनी

यह आंदोलन प्रदेशभर में राजस्व कामकाज को प्रभावित कर सकता है। अगर जल्द हल नहीं निकला, तो आम जनता को लम्बे समय तक परेशानी झेलनी पड़ सकती है। आंदोलनकारी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अंतिम समय तक शासन से संवाद के लिए तैयार हैं, लेकिन अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा।

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