
54 हाथियों के झुंड से मरवाही में दहशत! 14 दिनों से जंगलों में डेरा, खेतों में तबाही; मटियाडांड में हाथी के हमले से ग्रामीण की मौत के बाद बढ़ी चिंता…!


गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले के मरवाही वन मंडल में 54 हाथियों के विशाल झुंड की लगातार मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 13 से 14 दिनों से हाथियों का झुंड मरवाही वन परिक्षेत्र के मटियाडांड और नाका क्षेत्र के आसपास जंगलों में डेरा जमाए हुए है। दिनभर जंगलों में रहने वाला हाथियों का झुंड रात होते ही भोजन और विचरण की तलाश में ग्रामीण इलाकों तथा खेतों की ओर पहुंच रहा है। इससे जहां किसानों की मेहनत से तैयार फसलें बर्बाद हो रही हैं, वहीं ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता बनी हुई है।
54 हाथियों की लगातार आवाजाही, रात में गांवों और खेतों तक पहुंच रहा झुंड..!

जानकारी के अनुसार हाथियों का यह विशाल झुंड पिछले करीब दो सप्ताह से क्षेत्र के जंगलों में लगातार विचरण कर रहा है। रात के समय हाथियों की आवाजाही ग्रामीण क्षेत्रों की ओर बढ़ जाती है। इस दौरान कई किसानों के खेतों में खड़ी फसलों को हाथियों द्वारा रौंदे जाने से नुकसान पहुंचा है। किसानों के सामने अब फसल बचाने के साथ-साथ अपनी सुरक्षा की भी चुनौती खड़ी हो गई है। सबसे चिंताजनक पहलू मटियाडांड क्षेत्र में हाथी के हमले से एक ग्रामीण की मौत की पूर्व घटना है। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भय और अधिक बढ़ गया है। जंगल से लगे गांवों में रहने वाले लोग रात के समय घरों से बाहर निकलने, खेतों की रखवाली करने और सुनसान रास्तों से गुजरने में भी डर महसूस कर रहे हैं।
अभी वर्तमान में हाथी, दानीकुंडी/नाका क्षेत्र में है…!

वन विभाग का उड़नदस्ता और मैदानी अमला अलर्ट….!
हाथियों की लगातार मौजूदगी को देखते हुए मरवाही वन विभाग की उड़नदस्ता टीम, वनरक्षक नाका सहित मैदानी अमला लगातार निगरानी में जुटा हुआ है। विभागीय टीमों द्वारा हाथियों के मूवमेंट, उनकी लोकेशन और संभावित दिशा पर नजर रखी जा रही है, ताकि आसपास के गांवों को समय रहते सतर्क किया जा सके।
वन विभाग का अमला ग्रामीणों को समझाइश दे रहा है कि हाथियों के नजदीक जाने, उन्हें देखने के लिए भीड़ लगाने, फोटो या वीडियो बनाने तथा उनके रास्ते में आने से बचें। विशेष रूप से रात के समय जंगल और खेतों की ओर अकेले जाने से परहेज करने की सलाह दी जा रही है।
फसल नुकसान के साथ ग्रामीणों की जान की सुरक्षा बड़ी चुनौती….!
54 हाथियों के झुंड की लगातार आवाजाही से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं पूर्व में मटियाडांड में हाथी के हमले से हुई जनहानि ने मानव-हाथी संघर्ष के खतरे को और गंभीर बना दिया है।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित गांवों में वन विभाग की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। हाथियों की आवाजाही वाले मार्गों पर नियमित मुनादी कराई जाए, संवेदनशील क्षेत्रों में विभागीय टीमों की मौजूदगी सुनिश्चित हो तथा प्रभावित किसानों को फसल क्षति का उचित मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
54 हाथियों के झुंड से ग्रामीणों को कब मिलेगी राहत?
मरवाही वन मंडल में 13-14 दिनों से हाथियों के लगातार डेरा जमाए रहने के बीच सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हाथियों का प्राकृतिक विचरण अपनी जगह है, लेकिन जंगलों से लगे गांवों में रहने वाले लोगों की जान और उनकी आजीविका की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में हाथियों का यह झुंड किस दिशा में आगे बढ़ता है और वन विभाग संभावित खतरे को कम करने के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाता है। फिलहाल मटियाडांड, नाका और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
सावधानी और अपील: हाथियों को देखकर उनके नजदीक न जाएं, उन्हें भगाने या छेड़ने का प्रयास न करें।















