
फर्जी पट्टों के आरोपों पर उठे सवाल, बिना सत्यापन गिरदावरी और धान बिक्री की जांच की मांग
जीशान अंसारी की रिपोर्ट,बेलगहना/कोटा। ग्राम कोनचरा, जरगा, सुखेना, पहंदा एवं सोढ़ाकला के जंगल क्षेत्रों में वन विभाग की भूमि से जुड़े कथित संदिग्ध वन अधिकार पट्टों और उनके आधार पर गिरदावरी व धान बिक्री किए जाने के आरोपों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को लेकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।

शिकायत में कक्ष क्रमांक 1050, 1051 एवं 1052 की वन भूमि का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों द्वारा संदिग्ध वन अधिकार पट्टों के आधार पर वन भूमि पर कब्जे का दावा किया जा रहा है। आरोप यह भी है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन गिरदावरी दर्ज कराकर धान बिक्री की गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार, कुछ कथित पट्टाधारियों के नाम वन अधिकार पट्टों की मूल एवं आधिकारिक सूची में दर्ज नहीं होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में संबंधित पट्टों और दस्तावेजों का सरकारी अभिलेखों से मिलान करने के साथ मौके पर भौतिक सत्यापन और भूमि सीमांकन कराया जाना जरूरी है।

संयुक्त जांच टीम गठित करने की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद सदस्य रोहणी नेतु यादव एवं वन कर्मी ने वन विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम गठित कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत में संदिग्ध पट्टों की वैधता, वन भूमि की स्थिति, सीमांकन तथा गिरदावरी और धान बिक्री से जुड़े अभिलेखों की जांच कराने की मांग की गई है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान यदि किसी व्यक्ति, कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता अथवा दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा प्रमाणित होता है, तो संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार FIR सहित वैधानिक कार्रवाई की जाए।
अब नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं और जांच के बाद संदिग्ध पट्टों, गिरदावरी एवं धान बिक्री को लेकर वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।















