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कई सालों से पेंशन स्वीकृत कराने भटक रही 100 प्रतिशत दिव्यांग, अशिक्षित, आदिवासी युवती, शासन-प्रशासन बेखबर 

कई सालों से पेंशन स्वीकृत कराने भटक रही 100 प्रतिशत दिव्यांग, अशिक्षित, आदिवासी युवती, शासन-प्रशासन बेखबर 

गौरेला पेंड्रा मरवाही:- जिले के गठन के बाद से लोगों की समस्याओं में कमी होने के बजाय लगातार वृद्धि हो रही है l

विभागों की उदासीनता के कारण आदिवासी अंचल के भोले -भाले लोगों को शासन की मूलभूत योजनाओं से भी वंचित होना पड़ता है l एक ऐसा ही मामला मरवाही विकासखंड की ग्राम सिवनी में सामने आया है जहां 100 प्रतिशत आंखो से दिव्यांग 18 वर्षीय अशिक्षित आदिवासी युवति को पेंशन की सुविधा नहीं मिल रही है l ग्राम सिवनी के सिलवारी टोला निवासी आदिवासी युवती भोजवती सिंह पिता जगत राम आंखों से 100 प्रतिशत दिव्यांग है जिसका जिला मेडिकल बोर्ड से दिव्यंगता प्रमाण पत्र भी बना है और दिव्यांग मितान एवं शासन की दिव्यंगता सूची में भी उसका नाम कई सालों से अंकित है लेकिन समाज कल्याण विभाग की लापरवाही से उसे आज तक पेंशन का लाभ से वंचित होना पड़ रहा है l दिव्यांग युवती के माता ने जनसंवाद को बताया कि जहां-जहां भी शिविर लगता है हम पेंशन के आवेदन जमा करते हैं लेकिन इससे कम दिव्यंगता वालों को पेंशन मिलने लगता है लेकिन मेरी बेटी को न जाने क्यों पेंशन नहीं मिल रहा है, मैंने कई बार ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत में भी आवेदन जमा किया है फिर भी वहां से भी पेंशन स्वीकृत नहीं हुआ जबकि मेरी बेटी का खाता भी बैंक में खुला है और आधार कार्ड भी बना है l दिव्यांगों को 10 किलो मुफ्त मिलने वाला राशन कार्ड भी अभी तक नहीं बना है l समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांग छड़ी भी नहीं दिया गया है मेरी बेटी बिना किसी के सहारे घर में भी नहीं चल फिर सकती है बाहर जाने की बात तो दूर है l एक दिव्यांग मां-बाप के अलावा सब पर बोझ होता है l बेटी के पिता भी इस दुनिया से नहीं है मैं अनपढ़ महिला पेंशन बनवाने कहां-कहां जाऊं जितना हो सके मैं प्रयास किया है l दिव्यांग आदिवासी युवति की हालात ऐसे समय में है जब सूबे के मुखिया, विधायक और कलेक्टर सभी आदिवासी समाज से हैं और शासकीय योजनाओं का हकीकत धरातल पर नहीं सिर्फ कागजो पर दिखाई देता है l

बहरहाल आगे देखना यह होगा कि 100 प्रतिशत दिव्यांग आदिवासी युवती से संबंधित समाचार प्रकाशित करने के बाद शासन-प्रशासन द्वारा आगे क्या उचित कदम उठाए जाते हैं ?…

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