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डीएफओ से भी ताकतवर निकला वायरलेस ऑपरेटर! मरवाही वनमंडल में फिर भ्रष्टाचार की गूंज !

डीएफओ से भी ताकतवर निकला वायरलेस ऑपरेटर! मरवाही वनमंडल में फिर भ्रष्टाचार की गूंज !

जीपीएम। मरवाही वनमंडल एक बार फिर चर्चाओं और विवादों के केंद्र में है। बताया जा रहा है कि 20 वर्षों से प्रभारी स्टेनो रहे पुरुषोत्तम कश्यप ने डीएफओ मरवाही को एक आवेदन भेजकर स्वयं को प्रभार से मुक्त करने की मांग की है। सूत्रों के अनुसार, यह आवेदन विभागीय जांच के बढ़ते दबाव और भ्रष्टाचार के खुलासों से बचने की मंशा से दिया गया माना जा रहा है।जानकारी के मुताबिक, कश्यप ने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि वे लंबे समय से विभाग में सेवारत हैं और “हार्ट पेशेंट” होने के कारण अब आगे काम नहीं कर सकते। लेकिन विभागीय सूत्रों का कहना है कि उनकी यह बीमारी कोई नई नहीं है — वे पिछले 10 वर्षों से इसी समस्या से जूझते हुए भी पद पर बने रहे हैं।

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डीएफओ ग्रीष्मी चांद के पदभार ग्रहण करने के बाद विभाग में पूर्व के भ्रष्टाचार की परतें खुल रही हैं। कई अधिकारी और कर्मचारी अब जांच के दायरे में आ चुके हैं। ऐसे में कुछ कर्मचारी स्वेच्छा से तबादले या कार्यमुक्ति का आवेदन देकर जांच से बचने की कोशिश में लगे हुए हैं।सूत्रों के अनुसार, पुरुषोत्तम कश्यप का नाम उन कर्मचारियों में शामिल है जो पूर्व डीएफओ राकेश मिश्रा, संजय तिवारी, दिनेश पटेल, सशि कुमार और रौनक गोयल के करीबी माने जाते रहे हैं। उन पर गंभीर आरोप हैं कि उन्होंने विभागीय प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए टिकर (गौरेला) में आलीशान मकान बनाया, जमीनें खरीदीं, और अपने पुत्र व साले को नियम विरुद्ध वन विभाग में नियुक्त कराया। इतना ही नहीं, दोनों को वन कॉलोनी के सरकारी आवास भी बिना आबंटन आदेश के दे रखे हैं।कश्यप पर यह भी आरोप हैं कि उन्होंने विभागीय गोपनीयता भंग की, ट्रांसफर-पोस्टिंग में लेनदेन किया,

डीएफओ से बड़ा निकला आपरेटर_____

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वहीं विभागीय चर्चाओं में यह भी सामने आ रहा है कि एक वायरलेस ऑपरेटर पुरुषोत्तम कश्यप, जो डीएफओ से नीचे का कर्मचारी है, वास्तव में विभाग में डीएफओ से भी ज्यादा प्रभावशाली बन बैठा है। सूत्रों के अनुसार, उसने स्वयं डीएफओ को व्हाट्सएप में पत्र लिखकर कहा कि “मैं पेशेंट हूं, मुझे स्टेनो प्रभार से मुक्त किया जाए।”लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या मरवाही वनमंडल में अब वायरलेस ऑपरेटर का दबदबा डीएफओ से भी बड़ा हो गया है? क्योंकि न तो डीएफओ उनके विरुद्ध कार्यवाही कर पा रही हैं और न ही विभाग के अन्य अधिकारी आवाज उठा पा रहे हैं। स्थानीय लोगों और वनकर्मचारियों ने डीएफओ ग्रीष्मी चांद से मांग की है कि पुरुषोत्तम कश्यप के पुत्र एवं साले को तत्काल विभागीय कार्य से हटाया जाए, उनकी संपत्ति की जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि मरवाही वनमंडल में वर्षों से जड़ जमाए भ्रष्टाचार की सफाई हो सके।

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