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प्रशासनिक अनुमति के बाद हुए कार्यक्रम में मर्यादा भंग, नोट उड़ाते SDM का वीडियो वायरल, कलेक्ट्रेट में अटैच की कार्रवाई

प्रशासनिक अनुमति के बाद हुए कार्यक्रम में मर्यादा भंग, नोट उड़ाते SDM का वीडियो वायरल, कलेक्ट्रेट में अटैच की कार्रवाई !

रायपुर/गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अश्लील नृत्य और अधिकारियों के कथित मनोरंजन का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार उरमाल में आयोजित छह दिवसीय कार्यक्रम में ओडिशा से बुलाई गई महिला डांसर्स ने अर्धनग्न अवस्था में आपत्तिजनक नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान मौजूद रसूखदार लोग नोट लुटाते नजर आए। हैरानी की बात यह रही कि यह पूरा आयोजन जिला प्रशासन की अनुमति से संपन्न हुआ।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में मैनपुर के एसडीएम तुलसीदास मरकाम महिला डांसर के अश्लील नृत्य पर नोट उड़ाते हुए ठुमके लगाते दिखाई दे रहे हैं। यही नहीं, वीडियो में एसडीएम द्वारा मोबाइल से नृत्य रिकॉर्ड किए जाने का भी दावा किया जा रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हो रही है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह यूईक ने आयोजक के खिलाफ अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद आयोजक समेत चार लोगों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया गया है। साथ ही क्षेत्र के थानेदार को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

SDM हटाए गए, पुलिस पर भी कार्रवाई !

अश्लील नृत्य प्रकरण में मैनपुर के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तुलसीदास मरकाम को उनके पद से हटा दिया गया है। कलेक्टर भगवान सिंह यूईक ने पुष्टि करते हुए बताया कि संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से कलेक्टोरेट अटैच किया गया है। इसके अलावा दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

जांच समिति गठित

कलेक्टर ने मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए अपर कलेक्टर के नेतृत्व में एक जांच समिति का गठन किया है। समिति में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। जांच में कार्यक्रम की अनुमति प्रक्रिया, आयोजन के दौरान प्रशासनिक निगरानी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका सहित सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद समिति की रिपोर्ट संभागायुक्त (कमिश्नर) को भेजी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय होगी। यदि गंभीर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं के उल्लंघन का है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और कानून व्यवस्था पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

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