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पढ़ाई नहीं, इंतज़ार की सज़ा, बच्चों का भविष्य ताक पर, शिक्षक 2 घंटे लेट शिक्षा व्यवस्था हो रहा शर्मसार..?

जीशान अंसारी की रिपोर्ट, बिलासपुर : जिले के कोटा विकासखंड अंतर्गत संकुल केंद्र बानाबेल की शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पंडरा पथरा एक बार फिर शिक्षकों की मनमानी और लापरवाही का अड्डा बनती नजर आ रही है। शनिवार को विद्यालय का निर्धारित समय प्रातः 7:00 बजे है, लेकिन पदस्थ शिक्षक भूपेंद्र पांडे सुबह लगभग 9:10 बजे विद्यालय पहुंचे। करीब दो घंटे की देरी केवल “लापरवाही” नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ है। सुबह से स्कूल परिसर में बैठे बच्चे चिंतित हो कर इस बात का इंतजार करते रहे कि कब शिक्षक आएंगे और कब पढ़ाई शुरू होगी। यह दृश्य सरकारी शिक्षा व्यवस्था की असलियत को उजागर करता है, जहाँ जिम्मेदारी और अनुशासन केवल कागजों तक सीमित होकर रह गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि विद्यालय में समय पालन का कोई मतलब ही नहीं रह गया है। शिक्षक अपनी सुविधा से आते-जाते हैं और बच्चों की पढ़ाई भगवान भरोसे छोड़ दी जाती है। इस गंभीर मामले पर विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी नरेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि संबंधित शिक्षक के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी और नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल नोटिस और स्पष्टीकरण से कुछ नहीं बदलने वाला। जब तक ठोस और सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे शिक्षक अपनी मनमानी करते रहेंगे। ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन पर भी सवाल खड़े किए हैं कि आखिर निगरानी व्यवस्था कहां है? अगर अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण करते, तो बच्चों को इस तरह की परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। लोगों की स्पष्ट मांग है कि दोषी शिक्षकों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो, वेतन कटौती से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई की जाए, ताकि एक कड़ा संदेश जाए। यह मामला सिर्फ एक स्कूल का नहीं, बल्कि पूरी सरकारी शिक्षा व्यवस्था की गिरती हालत का आईना है, जहाँ बच्चों का भविष्य लापरवाही और भ्रष्ट सिस्टम की भेंट चढ़ता जा रहा है।

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