
जल संसाधन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग, जल संरक्षण से सिंचाई विस्तार तक राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा मान
लगातार दो वर्षों में राष्ट्रीय उपलब्धि, 25 परियोजनाओं से 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को मिला सिंचाई का लाभ

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और सिंचाई क्षमता के विस्तार को लेकर किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। जल संचय एवं जनभागीदारी के क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि वर्ष 2026-27 में भू-जल संरक्षण के क्षेत्र में राज्य को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ है। जल संसाधन विभाग के लिए इसे लगातार बेहतर होते जल प्रबंधन और संरक्षण प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।


इस उपलब्धि के पीछे राज्य स्तर पर जल संरक्षण की योजनाओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के साथ मैदानी स्तर पर सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार पर भी जोर दिया गया है। जल संसाधन एवं भू-जल सर्वेक्षण मंडल, रायपुर में राज्य स्तरीय सहायक नोडल अधिकारी के रूप में कार्यरत अधीक्षण अभियंता आई.ए. सिद्दीकी की भूमिका भी इस दौरान महत्वपूर्ण रही है।
विभागीय जानकारी के अनुसार, उनके कार्यकाल में करीब 25 छोटी-बड़ी सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूरा हुआ है। इन परियोजनाओं के परिणामस्वरूप वर्तमान में लगभग 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है। यह उपलब्धि ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब राज्य में सिंचाई क्षमता बढ़ाने के साथ जल स्रोतों के संरक्षण और भू-जल स्तर को बनाए रखने पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है।

अरपा भैंसाझार से सिकासार कोडार तक
बिलासपुर संभाग की अरपा भैंसाझार परियोजना में पहली बार सिंचाई कार्य शुरू होने को भी इस अवधि की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया गया है। इसी तरह गरियाबंद संभाग की सिकासार कोडार लिंकिंग परियोजना के लिए स्वीकृति और निविदा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।
इन परियोजनाओं का महत्व केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार से कृषि क्षेत्र को स्थायी जल उपलब्धता देने, खेती का रकबा बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की संभावनाएं भी जुड़ी हैं।
जल संरक्षण और सिंचाई—दोनों मोर्चों पर फोकस
छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में जल संसाधन विभाग की भूमिका केवल बांध और नहर निर्माण तक सीमित नहीं है। बदलते जलवायु परिदृश्य में वर्षाजल का संरक्षण, भू-जल का संवर्धन, उपलब्ध जल का बेहतर प्रबंधन और सिंचाई क्षमता का विस्तार समान रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में जल संचय में राष्ट्रीय प्रथम स्थान और भू-जल संरक्षण में द्वितीय स्थान राज्य के लिए विशेष महत्व रखता है।
जल संसाधन विभाग की इन पहलों से एक ओर जहां जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास सामने आता है, वहीं दूसरी ओर सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाने की दिशा में भी काम हुआ है। यही संतुलन छत्तीसगढ़ के जल प्रबंधन मॉडल को व्यापक रूप देता है।















