झमाझम खबरेंट्रेंडिंगप्रदेशराजनीतीरायपुर

GPM : “योग्य कर्मचारियों की पड़ा अकाल,” आदेश की खुलेआम उड़ाई धज्जियां, एक शिक्षक को तीन-तीन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां..?

मिथलेश आयम, रायपुर । छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग ने मंडल संयोजक पद को लेकर बड़ा फैसला लिया है। विभाग के प्रिंसिपल सिकरेट्री सोनमणि बोरा ने प्रदेशभर के कलेक्टरों को पत्र जारी कर अन्य विभागों के कर्मचारियों को मंडल संयोजक का प्रभार न सौंपने का सख्त निर्देश दिया है। इसके बावजूद भी गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में आदेश की पूर्णतः धज्जियाँ उड़ाई गई है। नियम विरुद्ध मंडल संयोजक की नियुक्ति और शिक्षकों को प्रभार देना, एक गंभीर प्रशासनिक समस्या है। इससे न केवल शिक्षा विभाग में अनियमितताएं होती हैं, बल्कि योग्य कर्मचारियों के साथ अन्याय भी होता है। मंडल संयोजक का पद एक महत्वपूर्ण पद है, जिसके लिए विभागीय नियमों के अनुसार ही नियुक्ति होनी चाहिए।

न्यायालयीन विवाद की चेतावनी :- 

सोनमणि बोरा जी ने पत्र में ये भी स्पष्ट आदेश किया है की निर्देश के बावजूद यदि अन्य विभाग के कर्मचारियों को प्रभार सौंपा गया और भविष्य में कोई न्यायालयीन विवाद या प्रशासनिक बाधा उत्पन्न होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी सख्त कार्रवाई की जाएगी।केवल आदिम जाती कल्याण विभाग के अधीक्षक, सहायक अधीक्षक अथवा संबंधित पत्र कर्मचारियों को ही सौपी जाए।

एक ही शिक्षक को तीन महत्वपूर्ण पद का प्रभार प्रशासनिक व्यवस्था पर गूंज रहा सवाल :-

गौरेला से जारी आदेश में शिक्षा विभाग के प्रधान पाठक लोरिक सनेही को न केवल आदिवासी बालक छात्रावास खोडरी का प्रभारी अधीक्षक नियुक्त किया गया, बल्कि अब उन्हें गौरेला विकासखंड का मंडल संयोजक भी बना दिया गया है। यानी एक ही व्यक्ति – प्रधान पाठक, छात्रावास अधीक्षक और मंडल संयोजक – तीन-तीन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहा है। यह स्थिति न केवल शासन के आदेशों की अवहेलना है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के साथ किया जा रहा एक गैरजिम्मेदाराना खिलवाड़ भी है।

जिला प्रशासन से नागरिक व जनप्रतिनिधि किए सवाल :- 

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि यह पूरा मामला केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित ‘समझौते’ की ओर इशारा करता है। जब विभागीय अधीक्षक और कर्मचारी मौजूद हैं, तब शिक्षा विभाग के व्यक्ति को तीनहरी जिम्मेदारी देना किसके आदेश पर हुआ – यह सवाल अब आम जनता के बीच गूंजने लगा है।

Back to top button
error: Content is protected !!