
3.83 करोड़ के निर्माण भुगतान के बावजूद मूल नस्ती और दस्तावेज गायब, जांच में दोषी पाए गए तत्कालीन अधिकारी, संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटर की सेवा समाप्त
कोरबा, 20 सितंबर 2025 आदिवासी विकास विभाग कोरबा में वित्तीय वर्ष 2021-22 के तहत छात्रावास और आश्रमों में किए गए निर्माण एवं नवीनीकरण कार्यों में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। विभाग ने 34 स्वीकृत निर्माण कार्यों की मूल नस्ती और संबंधित दस्तावेजों की अनुपस्थिति के मामले में संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटर कुश देवांगन की सेवा समाप्त कर दी है।।

अनियमितताओं का मामला:
संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 में आदिवासी विकास विभाग ने जिले के विभिन्न छात्रावास और आश्रमों में 34 लघु निर्माण एवं नवीनीकरण कार्यों के लिए कुल 3 करोड़ 83 लाख 28 हजार रुपए की स्वीकृति दी थी। स्वीकृत फर्म और राशि इस प्रकार हैं:श्री साईं ट्रेडर्स पॉलीवाल बुक डिपो, रामपुर – 9 कार्य, 73.28 लाख,श्री साईं कृपा बिल्डर्स, छुरी – 9 कार्य, 1.14 करोड़,एस.एस.ए. कंस्ट्रक्शन, चैतमा – 6 कार्य, 49 लाख,बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर, कटघोरा – 10 कार्य, 1.47 करोड़,इन कार्यों के एवज में फर्मों को कुल 2 करोड़ 90 लाख 95 हजार 904 रुपए का भुगतान किया गया, लेकिन निविदा अभिलेख, कार्य आदेश, प्राक्कलन, माप पुस्तिका, देयक वाउचर और मूल नस्ती कार्यालय से गायब पाए गए।
जांच में पाए गए दोषी:
जिला स्तरीय संयुक्त जांच टीम ने मामले की जांच की और तत्कालीन सहायक आयुक्त माया वारियर, तत्कालीन सहायक अभियंता अजीत कुमार तिग्गा, तथा तत्कालीन उप-अभियंता राकेश वर्मा को मुख्य रूप से जिम्मेदार पाया। आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 के तहत मामला दर्ज किया गया।
कुश देवांगन की सेवा समाप्ति:
शाखा प्रभारी विकास कुमार पाण्डेय के लिखित बयान और एफआईआर दर्ज होने के बाद, संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटर कुश देवांगन की 22 जुलाई 2025 को सेवा अवधि समाप्त होने के उपरांत विभाग ने सेवा का विस्तार नहीं किया और उनकी सेवा समाप्त कर दी।आरोपित अधिकारियों ने इस विभागीय कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत आवेदन किया था, जो स्वीकृत हो गया है।यह मामला आदिवासी विकास विभाग में निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को उजागर करता है और स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई को भी चुनौतीपूर्ण बनाता है।





