कुड़कई पंचायत में राहुल विश्वकर्मा की भूमिका पर गंभीर आरोप — सचिव संतराम यादव पर फर्जीवाड़े का आरोप, मामला गंभीर।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (छत्तीसगढ़) -: जिले के ग्राम पंचायत कुड़कई में पंचायत सचिव संत राम यादव और उनके नज़दीकी सहयोगी राहुल विश्वकर्मा को लेकर विवाद ने ऐसा रूप ले लिया है कि ग्रामीणों ने प्रशासन से तुरंत जांच कराने की मांग कर दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव ने बिना किसी सरकारी आदेश या अनुमति के राहुल विश्वकर्मा को पंचायत भवन में डेटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में तैनात किया और उसे पंचायत भवन में एक विशेष केबिन भी उपलब्ध कराया।ग्रामीणों का कहना है
कि इसी केबिन से पंचायत के सभी डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड तैयार किए जाते हैं, और कई मामलों में मनरेगा जैसे सरकारी योजना में फर्जी तरीके से लाखों रुपये का भुगतान किया गया। सूत्रों के मुताबिक, राहुल विश्वकर्मा सचिव के नज़दीकी सहयोगी के रूप में काम करता है और कई संवेदनशील कार्यों में उसकी भागीदारी लगातार जारी है।स्थानीय निवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि पंचायत भवन में प्रवेश सीमित रखा जाता है और जनता या ग्रामीण प्रतिनिधियों को महत्वपूर्ण दस्तावेज तक पहुँच नहीं दी जाती। ग्रामीणों का कहना है कि सचिव और उनके सहयोगी के संयोजन से योजना कार्यों की प्रक्रियाओं में खुला घोटाला और पारदर्शिता की कमी देखी जा रही है।कुछ ग्रामीणों ने बताया कि राहुल विश्वकर्मा और उसके परिवार के नाम पर मनरेगा जॉब कार्ड, से कई बार फर्जी हाजिरी कर भुगतान किए गए। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि कई व्यक्तियों ने शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।इस पूरे मामले ने पंचायत भवन को जनता के लिए पारदर्शिता का केंद्र बनने के बजाय संदिग्ध गतिविधियों और निजी नियंत्रण का केंद्र बना दिया है। छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 के तहत पंचायत सचिव को किसी व्यक्ति की नियुक्ति करने या सरकारी भवन को निजी उपयोग के लिए देने का अधिकार नहीं है, और ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव ने इस नियम की खुली अवहेलना की है।जिला प्रशासन और जनपद पंचायत अधिकारियों ने बताया कि शिकायत प्राप्त होने पर जांच टीम गठित की जा सकती है और यदि अनियमितता पाई जाती है, तो सख्त प्रशासनिक और वित्तीय कार्रवाई की जाएगी। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की चुप्पी और लापरवाही ने जनता का विश्वास डगमगा दिया है।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की त्वरित और निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे लोकायुक्त, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और उच्च प्रशासनिक निकायों तक शिकायत ले जाएंगे। उनका कहना है कि केवल जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई ही कुड़कई पंचायत में योजना और फंड की पारदर्शिता को बहाल कर सकती है।कुड़कई पंचायत का यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन चुका है। ग्रामीण पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन जांच की प्रतीक्षा में है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल पंचायत प्रणाली पर सवाल नहीं उठाएगा, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं की विश्वसनीयता और सरकारी कोष के उपयोग पर भी गहरा असर डालेगा।





