मरवाही वन मंडल में मजदूरी भुगतान विवाद गहराया श्रमिकों का आरोप – महीनों से रोका जा रहा मेहनताना, प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग

मरवाही वन मंडल में मजदूरी भुगतान विवाद गहराया
श्रमिकों का आरोप – महीनों से रोका जा रहा मेहनताना, प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
गौरेला–पेंड्रा–मरवाही। जिले के मरवाही वन मंडल में प्लांटेशन कार्यों में लगे श्रमिकों की मजदूरी भुगतान को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है। श्रमिकों ने आरोप लगाया है कि उनकी मेहनत की कमाई समय पर नहीं दी जा रही है, जिससे परिवार की रोज़मर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।
खोडरी रेंज के लाटा,साधवानी, अमारु, देवरी खुर्द, नेवरी, कोटगार सहित कई गांवों के मजदूरों ने बताया कि वन मंडल के लिपिक शैल गुप्ता द्वारा मजदूरी और अन्य भुगतान रोके जा रहे हैं। श्रमिकों का कहना है कि वे लगातार पौधारोपण, सिंचाई और देखरेख का कार्य करते आ रहे हैं, लेकिन महीनों से उन्हें पूरा मेहनताना नहीं मिल पा रहा है।
श्रमिकों की पीड़ा
ग्रामीण मजदूरों ने बताया कि मजदूरी न मिलने से उनके घरों में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और बीमारियों के इलाज तक पर असर पड़ रहा है। कई श्रमिकों ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि बकाया मजदूरी जल्द नहीं दी गई तो वे काम बंद कर आंदोलन करेंगे।
लिपिक पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, वन मंडल में लंबे समय से पदस्थ शैल गुप्ता पर श्रमिकों की निगाहें टिकी रहती हैं। मजदूरों का कहना है कि जो भी बिल–वाउचर भुगतान के लिए जाता है, वह सबसे पहले शैल गुप्ता के पास ही अटक जाता है। मजदूरों का आरोप है कि उनकी फाइलें और भुगतान जानबूझकर रोके जाते हैं।
प्रशासन से गुहार
श्रमिकों ने जिला प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए सभी मजदूरों का बकाया भुगतान तत्काल सुनिश्चित किया जाए।
बढ़ती नाराजगी
वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीण इलाकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।





