बजट में बड़ी सौगात: प्रदेश के 5 लाख कर्मचारियों को मिली मेडिकल कैशलेस सुविधा

बजट में बड़ी सौगात: प्रदेश के 5 लाख कर्मचारियों को मिली मेडिकल कैशलेस सुविधा
रायपुर।छत्तीसगढ़ के लगभग 5 लाख शासकीय कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। विधानसभा सत्र की शुरुआत के साथ राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में कर्मचारियों एवं उनके परिजनों के लिए मेडिकल कैशलेस सुविधा लागू करने की घोषणा की गई। इस घोषणा के बाद प्रदेशभर के कर्मचारियों में उत्साह और संतोष का माहौल है।
यह मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी। छत्तीसगढ़ मेडिकल कैशलेस कर्मचारी कल्याण संघ पिछले कई वर्षों से प्रदेश के प्रत्येक कर्मचारी के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने को लेकर निरंतर प्रयासरत था। संगठन के सतत संघर्ष, संवाद और जनजागरण अभियानों के परिणामस्वरूप अंततः सरकार ने इस दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया।
क्या है मेडिकल कैशलेस सुविधा
मेडिकल कैशलेस व्यवस्था के तहत अब कर्मचारियों को अपने या अपने परिवार के उपचार के लिए पहले स्वयं राशि खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी। न तो रीइंबर्समेंट की लंबी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा और न ही इलाज के लिए उधार या संपत्ति बेचने जैसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ेगा। यह सुविधा कर्मचारियों के आर्थिक और मानसिक बोझ को काफी हद तक कम करेगी।
संगठन के संघर्ष की रूपरेखा, संगठन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार—
जून 2022 में कैशलेस चिकित्सा सुविधा का विचार सामने आया।अगस्त 2022 में 10 संस्थापक साथियों के साथ संगठन का औपचारिक गठन किया गया। तत्कालीन सरकार को ज्ञापन सौंपा गया। प्रारंभ में केवल शासकीय अस्पतालों में कैशलेस व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव आया, जिसका संगठन ने विरोध किया और व्यापक व्यवस्था की मांग की। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकार के गठन उपरांत स्वास्थ्य मंत्री को कुशाभाऊ ठाकरे भवन में आयोजित समस्या निवारण शिविर में ज्ञापन दिया गया।
फरवरी माह में इस संबंध में कमेटी का गठन किया गया।
स्वास्थ्य संचालक सेवाओं की कमेटी को संगठन की ओर से विस्तृत ड्राफ्ट प्रस्तुत किया गया।रक्षाबंधन पर मुख्यमंत्री के नाम प्रतीकात्मक रूप से राखी भेजी गई।परिवारजनों द्वारा पोस्टकार्ड अभियान चलाया गया।
जन समस्या निवारण शिविरों में हजारों कर्मचारियों एवं उनके परिजनों ने आवेदन देकर मांग को मजबूत किया।जिला संयोजकों ने कलेक्टरों के माध्यम से अपनी बात शासन तक पहुंचाई।
मंत्री, सांसद और विधायकों के माध्यम से लगातार संवाद किया गया तथा विधानसभा सत्र के दौरान भी प्रतिनिधिमंडल ने अपनी बात रखी।सरकार ने दबाव और मांग की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया।दुर्ग वैशाली नगर में आयोजित प्रांतीय सम्मेलन में विधायक रिकेश सेन द्वारा संगठन के प्रयासों की सराहना की गई। सचिव स्तर पर कार्रवाई प्रारंभ हुई और विषय को विधिवत प्रक्रिया में लिया गया।
पूर्व विधानसभा सत्र में भी संगठन के माध्यम से विधायकों द्वारा प्रश्न लगाया गया और मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री एवं वित्त मंत्री के समक्ष विषय उठाया गया।
नेतृत्व की भूमिका
संगठन की प्रदेश अध्यक्ष उषा चंद्राकर एवं संरक्षक राकेश सिंह के नेतृत्व में यह आंदोलन निरंतर जारी रहा। प्रांतीय संयोजक पीयूष गुप्ता ने इस उपलब्धि को समस्त कर्मचारियों की एकजुटता और संगठन की सामूहिक शक्ति का परिणाम बताया।
उन्होंने कहा कि संगठन की एकसूत्रीय मांग मेडिकल कैशलेस थी, जिसके लिए लगातार प्रयास किए गए। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि वर्ष 2019 में पुरानी पेंशन योजना की घोषणा में भी इसी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। अब मेडिकल कैशलेस की घोषणा कर्मचारियों के लिए एक और बड़ी उपलब्धि है।
शासन के प्रति आभार
संगठन ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, वित्त मंत्री तथा सभी जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। साथ ही शहर, जिला, संभाग और विकासखंड स्तर के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का भी धन्यवाद ज्ञापित किया गया, जिन्होंने इस मांग को जनआंदोलन का रूप देने में भूमिका निभाई।
प्रांतीय संयोजक पीयूष गुप्ता ने प्रदेश के सभी कर्मचारियों से संगठन पर विश्वास बनाए रखने और कर्मचारी हितों के लिए आगे भी एकजुट रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संगठन भविष्य में भी कर्मचारी हितों की रक्षा और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।













