ग्राम सेखवा में 15वें वित्त की राशि का बड़ा घोटाला सरपंच-सचिव की मिलीभगत से उड़ी विकास की रकम..?

मिथलेश आयम, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही/कोटमी(खबरो का राजा) :- गांवों के समग्र विकास और ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा भेजी जाने वाली 15वें वित्त आयोग की राशि ग्राम पंचायत सेखवा में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये के गजब घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें ग्राम पंचायत की सरपंच उषा बाई और सचिव ओंकार सिंह की मिलीभगत सामने आ रही है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंचायत में 15वें वित्त की राशि का आहरण नियमों को ताक पर रखकर किया गया। विभिन्न निर्माण कार्यों, के लिए राशि स्वीकृत तो की गई, लेकिन अधिकांश कार्य कागजों में ही पूरे सिमट कर रहा गए। वहीं, कई बिल ऐसे भी लगाए गए हैं जिनका जमीनी अस्तित्व तक नहीं है। साहू हार्डवेयर कोटमी के नाम पर सेव – बूँदी का बिल प्रस्तुत किए गए, और भुगतान कर लिया गया गजब विडंबना की बात है जहाँ रेत, गिट्टी, सप्लाई के दुकान मे मेवा-मिष्ठान की बिल लगा दें रहे है। जिसे देखकर ही पूरे खेल की पोल खुलती है। जनपद पंचायत मरवाही के स्तर पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी इस पूरे मामले में मूकदर्शक बने हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि वहां बैठे “कठपुतली कर्मचारियों” को सिर्फ कमीशन से मतलब रहता है। पंचायत से भेजे गए फर्जी बिलों और भुगतान प्रस्तावों पर बिना जांच किए हस्ताक्षर कर दिए जाते हैं। इस वजह से ग्राम स्तर पर बैठे सरपंच और सचिवों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे खुलेआम सरकारी राशि का दुरुपयोग कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांव में वास्तविक विकास कार्य बहुत कम हुए हैं। अधिकांश योजनाओं की राशि का उपयोग सिर्फ कागजों में दिखाया गया है। नियमों के विरुद्ध कई बार एक ही दिन में कई वाउचर तैयार कर दिए गए। पंचायत सचिव और सरपंच ने आपसी सांठगांठ से रकम की बंदरबांट की और ऊपर तक कमीशन पहुंचा दिया गया। स्थानीय जनता अब जिला प्रशासन से जांच की मांग कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर निष्पक्ष जांच की जाए तो लाखों का घोटाला सामने आ सकता है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछले पांच वर्षों में पंचायत प्रतिनिधियों ने सरकारी योजनाओं को लूटा जिसमे जाँच भी हुआ और दोसी भी सिद्ध हुए लेकिन कार्यवाही नहीं हुआ जिसे अभी वर्तमान सरपंच की भी हौसले बुलंद साबित हो रहा और पंचायत की कुर्सी संभालते ही भ्रष्टाचार की बू लग गया है, तभी तो “खाक से फलक तक” पहुंचने वाली कहावत यहां चरितार्थ हो रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी ताकि ग्राम स्तर पर चल रही इस “विकास की लूट” पर रोक लग सके।





