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बिटगार्ड ‘कुंभकर्णी’ नींद मे सो रहे, माफिया ढो रहे: रतनपुर वन परिक्षेत्र में ईमारती लकड़ी की अवैध कटाई ठूंठ दे रहे साहब बर्बादी की गवाही।

बिलासपुर | कहने को तो वन विभाग का काम जंगलों की रक्षा करना है, लेकिन रतनपुर वन परिक्षेत्र के परसापनी बीट (क्रमांक 2549) में जो नजारा दिख रहा है, वह कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। यहाँ ‘पेड़ बचाओ’ का नारा केवल कागजों तक सीमित रह गया है, क्योंकि हकीकत में यहाँ कीमती इमारती पेड़ों पर कुल्हाड़ियां नहीं, बल्कि माफिया का ‘सिस्टम’ चल रहा है।

​🪓 बीट क्रमांक 2549: ठूंठ गवाही दे रहे हैं, पर साहब मौन हैं!

​जंगल के अंदर कदम रखते ही साल और अन्य बेशकीमती पेड़ों के कटे हुए ठूंठ अपनी बर्बादी की दास्तां सुनाते हैं। स्थानीय सूत्रों की मानें तो यह कोई रातों-रात हुआ काम नहीं है। लंबे समय से यहाँ कीमती लकड़ियों को काटकर ठिकाने लगाया जा रहा है।

​बड़े सवाल जो विभाग को चुभेंगे -:

​क्या बीट गार्ड और जिम्मेदार अधिकारी इतने ‘मासूम’ हैं कि उन्हें भारी मशीनों और पेड़ों के गिरने की आवाज सुनाई नहीं देती?

​क्या यह मान लिया जाए कि बिना ‘निचली मिलीभगत’ के जंगल की संपदा को खुलेआम बाहर ले जाना संभव है?

​दिन-रात चल रही इस कटाई पर अब तक कोई बड़ी जब्ती या गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?

​🐯 खतरे में वन्यजीव और पर्यावरण :-

​पर्यावरण प्रेमियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है। जंगलों के उजड़ने का सीधा असर वन्यजीवों पर पड़ रहा है, जो अब इंसानी बस्तियों की ओर रुख करने को मजबूर होंगे। अगर समय रहते वन विभाग की कुंभकर्णी नींद नहीं खुली, तो परसापनी का यह हरा-भरा क्षेत्र केवल नक्शों में सिमट कर रह जाएगा।हौसले इतने बुलंद हैं कि माफिया को अब कानून का डर नहीं रहा। ग्रामीण चीख-चीख कर बता रहे हैं, पर साहब की फाइलें शायद अभी भरी नहीं हैं।”

​🔍 अब देखना होगा…

​क्या खबर प्रकाशित होने के बाद बिलासपुर के उच्चाधिकारी एसी कमरों से निकलकर जंगलों की खाक छानेंगे? क्या उन लापरवाह कर्मचारियों पर गाज गिरेगी जिनकी नाक के नीचे यह ‘लकड़ी का खेल’ चल रहा है? या फिर हमेशा की तरह एक ‘जांच कमेटी’ बनाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

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