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गौरेला शिक्षा विभाग में अवकाश घोटाला ? फर्जी संतान पालन अवकाश रद्द, पर तुरंत मेडिकल अवकाश मंजूर ?

गौरेला शिक्षा विभाग में अवकाश घोटाला ? फर्जी संतान पालन अवकाश रद्द, पर तुरंत मेडिकल अवकाश मंजूर ?

आरोपों से घिरे व्याख्याता एलबी प्रभारी बीईओ संजीव शुक्ला पर कड़ी कार्यवाही की मांग…..!

गौरेला–पेन्ड्रा–मरवाही। अवकाश स्वीकृति में गड़बड़ी का बड़ा मामला उजागर ? 18 वर्ष की बेटी के नाम पर ‘संतान पालन अवकाश’ मंजूर, गलती पकड़े जाने पर आदेश रद्द; उसी दिन मेडिकल लीव स्वीकृत होने पर उठे गंभीर सवाल ? गौरेला विकासखंड शिक्षा विभाग में अवकाश स्वीकृति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है जानकारी के अनुसार शिक्षिका श्रीमती साधना राठौर ने अपनी 18 वर्ष पूर्ण हो चुकी पुत्री के नाम पर संतान पालन अवकाश के लिए आवेदन दिया था। नियमों के अनुसार किसी भी अधिकारी-कर्मचारी को 18 वर्ष पूर्ण हो जाने पर संतान पालन अवकाश की पात्रता स्वयमेव समाप्त हो जाती है बावजूद इसके गौरेला बीईओ (विकासखंड शिक्षा अधिकारी) संजीव शुक्ला द्वारा अवकाश स्वीकृत कर दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, जब बीईओ को अपने ही आदेश में की गई गंभीर गलती का पता चला तो आनन-फानन में संतान पालन अवकाश स्वीकृति आदेश को रद्द कर दिया गया।लेकिन विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ—उसी दिन शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से मेडिकल अवकाश स्वीकृत कर दिया गया, जिसने कई नए सवाल पैदा कर दिए हैं ?

शिक्षा जगत में चर्चा सुर्खियों पर….? क्या है सवाल…!

1.जब संतान पालन अवकाश फर्जी दस्तावेज़ के आधार पर लिया जाना पाया गया, तो शिक्षिका पर कार्यवाही क्यों नहीं की गई ? उल्टे उसी दिन मेडिकल अवकाश कैसे स्वीकृत हो गया ?

2.इस समय पूरे छत्तीसगढ़ में SIR के अंतर्गत शिक्षकों की BLO ड्यूटी लगी हुई है, जिसके कारण राज्य और जिला स्तर से अवकाश पर प्रतिबंध लागू है—फिर यह मेडिकल लीव किस आधार पर मंजूर की गई। ?

3.जिस डॉक्टर ने शिक्षिका को “मेडिकली अनफिट” बताया है, उसकी प्रमाणिकता पर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं। क्या मेडिकल सर्टिफिकेट जिला मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी किया गया ? क्या इसकी सत्यता की जांच हुई ?

लंबे समय से प्रभारी पद पर काबिज बीईओ पर भी सवाल !

सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई है। विभागीय गाइडलाइन स्पष्ट रूप से कहती है कि संजीव शुक्ला व्याख्याता एलबी हैं और उन्हें केवल अस्थायी तौर पर प्रभारी बीईओ का दायित्व दिया गया था, लेकिन वे पिछले लंबे समय से बीईओ के पूर्ण प्रभार पर बैठे हुए हैं। इसी वजह से अब उनकी भूमिका और निर्णय प्रक्रिया पर और भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

 डॉक्टर–बीईओ पर मिलीभगत के आरोप ?

सू्त्रों का आरोप है कि इस मामले में डॉक्टर और बीईओ के बीच लेनदेन का मामला हो सकता है ? आरोप है कि मोटी रकम लेकर मेडिकल अवकाश स्वीकृत किया गया है। विभाग के लोगों में इसको लेकर भारी नाराज़गी है।

लगातार विवादों में रहे संजीव शुक्ला,शासन- प्रशासन को दे रहे है चुनौती….?

तथ्य बताते हैं कि जब जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने SIR कार्य के कारण स्पष्ट तौर पर अवकाश प्रतिबंध का आदेश जारी किया है, तब बीईओ द्वारा अपने स्तर से मेडिकल अवकाश स्वीकृत करने की प्रक्रिया ही संदिग्ध है। मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और डॉक्टर द्वारा जारी मेडिकल सर्टिफिकेट की पुष्टि के साथ बीईओ की भूमिका की जांच की मांग तेज हो चुकी है।

 

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