उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से विभागीय अनुशासन पर संकट — मरवाही वनमंडल में ईमानदारी की जगह अब चल रहा है सौदेबाजी का बाजार____

उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से विभागीय अनुशासन पर संकट — मरवाही वनमंडल में ईमानदारी की जगह अब चल रहा है सौदेबाजी का बाजार____
_गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।मरवाही वनमंडल एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में बिलासपुर के सेवानिवृत्त मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) प्रभात मिश्रा पर पद का दुरुपयोग करते हुए लेनदेन के माध्यम से पोस्टिंग करने के गंभीर आरोप लगे हैं। यह मामला तब सामने आया जब रेंजर मान सिंह स्याम ने प्रभात मिश्रा पर संगीन आरोप लगाते हुए एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सार्वजनिक की, जिसमें कथित रूप से पैसों के लेन-देन की बातचीत सुनी जा सकती है।जानकारी के अनुसार, सीसीएफ प्रभात मिश्रा ने पहले रेंजर मान सिंह स्याम के खिलाफ कार्य में लापरवाही का हवाला देते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर को पत्र क्रमांक /स्था/2570 दिनांक 3 सितंबर 2025 को कार्रवाई हेतु प्रस्ताव भेजा था। लेकिन कुछ ही दिनों बाद, आरोप है कि एक लाख पचास हजार रुपये लेकर उसी अधिकारी को मरवाही वनमंडल के उड़नदस्ता प्रभारी के रूप में मड़ना रेंज में एडवांस पोस्टिंग दे दी गई।इस संबंध में मान सिंह स्याम ने बताया कि यह पोस्टिंग प्रधान मुख्य वन संरक्षक रायपुर के निर्देश (पत्र क्रमांक/प्रसा/रेजर कक्ष/08-3-2512817 दिनांक 8 दिसंबर 2020) को दरकिनार कर की गई। यही नहीं, ऑडियो में यह भी उल्लेख है कि उप वन क्षेत्रपाल मनीष श्रीवास्तव को निलंबन से बहाल करने के एवज में 3 लाख रुपये की सौदेबाजी की गई।बताया गया कि मनीष श्रीवास्तव को प्लांटेशन कार्य में गंभीर लापरवाही के चलते निलंबित किया गया था, लेकिन सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले ही सीसीएफ प्रभात मिश्रा ने उन्हें और निलंबित वनपाल उदय तिवारी को बहाल कर दिया। यही नहीं, वनरक्षक राकेश राठौर, जिन्हें पौधरोपण में लापरवाही के कारण निलंबित किया गया था, उन्हें सी सी एफ बिलासपुर द्वारा मात्र 24 घंटे में पुनः बहाल कर दिया गया था,वर्तमान में उदय तिवारी को क्षेत्र सहायक खोडरी के रूप में वर्दी में कार्य करते हुए देखा जा सकता है, जबकि राकेश राठौर साधवानी नर्सरी में निडर होकर कार्यरत हैं। यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि विभागीय कार्रवाई केवल दिखावा बनकर रह गई है और “पैसा ही सब कुछ” का चलन वन विभाग में आम बात हो चुकी है।वहीं, मरवाही वनमंडल अधिकारी द्वारा दागी कर्मियों के खिलाफ की गई ड्यूटी परिवर्तन की कार्रवाई को भी सीसीएफ प्रभात मिश्रा ने उलटते हुए डीएफओ पर ही नोटिस जारी कर दिया, जिससे स्पष्ट है कि उच्च अधिकारियों का दबाव निचले स्तर पर भी देखा जा रहा है।स्थानीय सूत्रों का कहना है कि मरवाही वनमंडल अब भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। कई अधिकारी-कर्मचारी पिछले 10 से अधिक वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं, और करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर चुके हैं। शिकायतों के बावजूद अब तक कई जांचें ठंडे बस्ते में पड़ी हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि —
क्या सेवानिवृत्त सीसीएफ प्रभात मिश्रा, मनीष श्रीवास्तव, उदय तिवारी, मान सिंह स्याम और राकेश राठौर पर विभागीय कार्रवाई होगी,
या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डालकर रफा-दफा कर दिया जाएगा..? विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह मामला अब मुख्यमंत्री कार्यालय और वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों तक पहुँच गया है, और यदि जांच निष्पक्ष हुई तो कई बड़े नामों का पर्दाफाश होना तय है।





