बिलासपुर : वन संपदा की हत्या मे डिप्टी रेंजर और बिट गार्ड की घिनौनी मिलीभगत की इशारा करोड़ों का पौधारोपण राजस्थानी चरवाहों के हवाले।

जीशान अंसारी की रिपोर्ट, बिलासपुर(खबरों का राजा) । रतनपुर वनपरिक्षेत्र के ग्राम पंचायत पचरा रिगवार अंतर्गत पचरा बिट कटेलिपारा के जंगलों में इन दिनों पर्यावरणीय अपराध का नया अध्याय खुल चुका है। राजस्थान से लाई गई हजारों भेड़, ऊंट और बकरियों को अवैध रूप से जंगलों में चराया जा रहा है। परिणामस्वरूप करोड़ों रुपये खर्च कर किए गए पौधारोपण की हरियाली को चरवाहों के हवाले कर दिया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह आपराधिक खेल कई दिनों से जारी है, लेकिन ड्यूटी रेंजर और बिट गार्ड समेत जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
डिप्टी रेंजर की लापरवाही और उदासीन रवैया सवालों के घेरे में है। आखिर करोड़ों की वन संपदा को किस तरह राजस्थानी चरवाहों के हवाले कर जंगल को बर्बाद होने दिया जा रहा है? वन नियमों के मुताबिक बिना अनुमति किसी भी प्रकार के पशु को वन क्षेत्र में प्रवेश की इजाजत नहीं दी जा सकती। बावजूद इसके हजारों भेड़-ऊंट जंगल में खुलेआम चरते रहे, जो प्रशासन और विभाग की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। स्थानीय समाज और पर्यावरणविदो ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यह मामला बड़े घोटाले का रूप ले लेगा और शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। अब हर नागरिक के जेहन में यही सवाल गूंज रहा है – क्या वन विभाग की चुप्पी और मिलीभगत पर कड़ी कार्रवाई होगी? या फिर यह पर्यावरणीय लूट-खसोट ऐसे ही जारी रहेगी?
“जब इस मामले में जानकारी के लिए डिप्टी रेंजर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो वे सर्किल में मौजूद नहीं मिले। वहीं, फोन से संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।”





