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नीलामी से ठीक पहले सचिव लापता..! कुड़कई पंचायत में फिर उठा भ्रष्टाचार का भूत,ग्रामीण बोले, “जनता के हक़ से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”

नीलामी से ठीक पहले सचिव लापता..! कुड़कई पंचायत में फिर उठा भ्रष्टाचार का भूत,ग्रामीण बोले, “जनता के हक़ से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही,कुड़कई ग्राम पंचायत में आज फिर एक बार पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। पंचायत सचिव संतराम यादव, जिन पर पहले से ही वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं, निर्धारित पशु पंजीयन ठेका नीलामी के दिन रहस्यमय ढंग से नदारद रहे।

ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत भवन में 28 अक्टूबर की सुबह नीलामी के लिए सभी पंच और ग्रामीण एकत्र हुए थे, लेकिन सचिव संतराम यादव वहाँ नहीं पहुँचे। कुछ देर बाद लोगों ने देखा कि भवन की दीवार पर एक कागज़ चिपकाया गया है, जिस पर लिखा था “अपरिहार्य कारणों से आज की पशु पंजीयन नीलामी निरस्त की जाती है।”

लोगों का आरोप है कि सचिव ने जानबूझकर नीलामी रद्द कर दी, ताकि बाद में मनमाफिक ठेकेदार को लाभ पहुंचाया जा सके। ग्रामीणों ने बताया कि यह पूरा खेल “पूर्व नियोजित” था और इसमें पुराने ठेकेदारों से मिलीभगत की बू आ रही है।

गांव के निवासी भोलाराम कश्यप ने कहा, “यह नीलामी नहीं, बंदरबांट की तैयारी थी। जब सब कुछ तय था, तो अचानक ‘अपरिहार्य कारण’ कहकर भागना क्या दर्शाता है?”ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पिछले वर्ष हुए ठेके में सचिव ने अपने करीबी ठेकेदारों — भरत कश्यप और उसके पिता — को ठेका दिया था। ठेका राशि न तो समय पर जमा की गई, न ही पंचायत की बहीखातों में उसका कोई हिसाब दर्ज है। लोगों का कहना है कि लाखों रुपये की राशि का कोई रिकॉर्ड नहीं है और पूरा पैसा हजम कर लिया गया।

आज की घटना के बाद ग्रामीणों में जबरदस्त नाराजगी है। उन्होंने पंचायत भवन के बाहर विरोध जताया और प्रशासन से सचिव के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की।गांव के बुजुर्ग कन्हैयालाल यादव ने कहा, “पंचायत जनता की संपत्ति है, किसी सचिव की निजी कंपनी नहीं। इस तरह की मनमानी अब नहीं चलेगी — जांच हो और दोषी को निलंबित किया जाए।”

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं होती, तो वे जन आंदोलन शुरू करेंगे।
अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं — क्या वाकई कुड़कई पंचायत में “भ्रष्टाचार का सिलसिला” रुकेगा या फिर यह मामला भी रफा-दफा हो जाएगा?

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