नियमों को किए दरकिनार आखिर बीआरसी नियुक्ति की पारदर्शिता नहीं, जिला प्रशासन मौन कार्यवाही करेगा कौन..?

(मिथलेश आयम) गौरेला–पेंड्रा–मरवाही :- जिले में ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर (BRC) की नियुक्ति को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पेंड्रा और मरवाही विकासखंड में हाल ही में हुई नियुक्तियों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। शिक्षक संगठनों और जानकारों का आरोप है कि बीआरसी पद हमेशा से प्रतिनियुक्ति (डेप्युटेशन) का माना जाता है, परंतु जिले में बिना विभागीय प्रक्रिया का पालन किए सीधे आदेश जारी कर नियुक्ति कर दी गई। इससे न केवल पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि विभागीय लेनदेन और मिलीभगत की चर्चाएँ भी तेज हो गई हैं।
पेंड्रा में सीधे आदेश से प्रभार :-
जारी आदेश (क्रमांक 3829/स्थापना/2024–25, दिनांक 21.11.2024) के तहत पेंड्रा के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मशीनटोला के प्रधान पाठक रामकुमार बघेल को बीआरसी पेंड्रा का प्रभार सौंपा गया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि वे शिक्षा कार्यालय का संपूर्ण कार्य संपादित करेंगे।लेकिन शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह नियुक्ति प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया के विरुद्ध है। गौर करने वाली बात यह है कि गौरेला विकासखंड में नियमों का पालन करते हुए बीआरसी चयन हुआ, जबकि पेंड्रा में अलग प्रक्रिया अपनाना “दोहरी व्यवस्था” का उदाहरण है।
मरवाही में और बड़ा विवाद :-
इधर मरवाही विकासखंड में तो और बड़ा खेल सामने आया है। यहाँ पेंड्रा विकासखंड के ही प्रधान पाठक अजय कुमार राय (पदस्थ–शा. पूर्व माध्यमिक शाला भर्रापारा, पेंड्रा) को बीआरसी मरवाही नियुक्त कर दिया गया। नियम के मुताबिक, किसी भी विकासखंड के बीआरसी पद के लिए वही प्रधान पाठक पात्र होता है जो उसी ब्लॉक में पदस्थ हो। अपवाद की स्थिति में कलेक्टर की अनुमति से ही अन्य ब्लॉक से नियुक्ति हो सकती है। लेकिन इस मामले में न पात्र स्थानीय प्रधान पाठकों पर विचार हुआ, न समिति की प्रक्रिया अपनाई गई।
नियमों की अनदेखी/प्रतिनियुक्ति का पद को सीधे आदेश कैसे सम्भव..?
शिक्षा विभाग की गाइडलाइन स्पष्ट कहती है –
# बीआरसी पद पर चयन के लिए उसी ब्लॉक के प्रधान पाठक पात्र होंगे।
# यदि स्थानीय स्तर पर पात्रता उपलब्ध न हो, तभी उच्च स्तर की अनुमति से अन्य ब्लॉक से नियुक्ति संभव है।
# चयन प्रक्रिया डीपीसी और डीईओ की समिति द्वारा तय होती है और कलेक्टर की सहमति के बाद आदेश जारी होता है।
लेकिन पेंड्रा और मरवाही दोनों ही मामलों में इन नियमों की अनदेखी सामने आई है।
उठ रहे सवाल कई सवाल….आखिर कहाँ गया नियम…?
# क्या प्रतिनियुक्ति पद पर सीधे आदेश से नियुक्ति संभव है…?
# एक ही जिले में दो अलग प्रक्रियाएँ क्यों अपनाई गईं….?
# क्या पात्र प्रधान पाठकों की अनदेखी शिक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ नहीं है?
# क्या इन नियुक्तियों के पीछे विभागीय लेनदेन और दबाव की भूमिका है?
अधिकारियों की चुप्पी :-
जब इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी से सवाल किया गया तो उन्होंने टिप्पणी करने से इंकार करते हुए केवल “जांच कर रिपोर्ट देने” की बात कही। वहीं विभागीय सूत्र मानते हैं कि नियुक्ति नियम विरुद्ध है।
शिक्षकों की मांग :-
स्थानीय शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट कहा है कि
# पेंड्रा और मरवाही दोनों ही विकासखंडों की बीआरसी नियुक्तियाँ तत्काल निरस्त की जाएँ।
# विभागीय प्रक्रिया और समिति के माध्यम से ही पारदर्शी नियुक्ति की जाए।
# जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई हो।
शिक्षा पर असर का खतरा :-
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन विसंगतियों का समाधान शीघ्र नहीं हुआ तो जिले की शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी। पेंड्रा, मरवाही और गौरेला ब्लॉकों में असंतोष बढ़ना तय है।





