
कोटा जनपद सीईओ युवराज सिन्हा पर गंभीर आरोप, चार साल से एक ही स्थान पर पदस्थापना पर भी उठे सवाल
*जीशान अंसारी की कलम से, बिलासपुर। जनपद पंचायत कोटा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) युवराज सिन्हा पर पंचायतों में कथित भ्रष्टाचार, शिकायतों की जांच प्रभावित करने और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों के निराकरण में अनियमितता सहित कई गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि युवराज सिन्हा वर्ष 2022 से जनपद पंचायत कोटा में पदस्थ हैं और करीब चार वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ रहने के कारण उनकी कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत स्तर पर हुए कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच को प्रभावित किया जाता रहा है। वहीं मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों को भी कथित रूप से कार्रवाई किए बिना बंद करने तथा पद का दुरुपयोग कर कागजी कार्रवाई पूरी करने के आरोप लगाए गए हैं।
जनमन योजना में भी उठे सवाल

विशेष संरक्षित जनजाति परिवारों के लिए संचालित जनमन योजना को लेकर भी कमीशनखोरी और कथित भ्रष्टाचार को दबाने के आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि योजना के क्रियान्वयन में सामने आई अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया गया।
100 से अधिक बैगा परिवारों के आवास में कथित गड़बड़ी का आरोप

प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार कोटा क्षेत्र में 100 से अधिक बैगा परिवारों के आवास में कथित वित्तीय अनियमितता हुई है। इसकी शिकायत सुशासन दिवस से लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और मुख्यमंत्री स्तर तक किए जाने की बात कही जा रही है।
आरोप है कि आवास शाखा के समन्वयक अनुराग ठाकुर द्वारा पर्याप्त फील्ड सत्यापन किए बिना हितग्राहियों के खातों में राशि डाली गई और कथित तौर पर ठेकेदारों द्वारा राशि निकाल ली गई। कुछ मामलों में जियो-टैगिंग के बिना ही किश्त जारी होने और आवास पूर्ण नहीं होने के बावजूद राशि निकल जाने के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस पूरे मामले की जांच को जनपद स्तर पर दबाने का प्रयास किया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
आमागोहन में शौचालय की राशि का मामला
स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम आमागोहन में हितग्राहियों को शौचालय निर्माण की राशि नहीं मिलने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस मामले की जांच को भी प्रभावित किया गया।
वहीं खोंगसरा और आमागोहन पंचायतों में लंबे समय से सचिव की अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक दो माह से अधिक समय से सचिव नहीं होने के कारण पंचायतों का नियमित कामकाज और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
कमीशन मांगने के आरोप, पुष्टि बाकी
सीईओ पर काम के बदले कथित कमीशन मांगने के आरोप भी लगाए गए हैं। बताया जा रहा है कि ऐसे आरोप पंचायत सचिवों और कुछ भाजपा नेताओं की ओर से भी लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
तबादले और जांच पर भी सवाल
शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि लंबे समय तक एक ही पद पर बने रहने के कारण अधिकारी के प्रभाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उनका दावा है कि जब स्थानांतरण या जांच की स्थिति बनती है तो न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर अधिकारी को किस स्तर से संरक्षण मिल रहा है।
पत्रकारों को मानहानि के मुकदमे की चेतावनी?
क्षेत्र में पंचायतों से जुड़ी कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर समाचार प्रकाशित करने वाले पत्रकारों को भी कथित तौर पर मानहानि का दावा करने की चेतावनी दिए जाने की बात सामने आई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं तो उनका समाधान निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई से होना चाहिए, न कि शिकायत या समाचार प्रकाशित करने वालों को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देकर।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतें बंद करने पर बड़ा सवाल
सबसे गंभीर सवाल मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों के निराकरण को लेकर उठ रहा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बार-बार आने वाली शिकायतों को इस आधार पर बंद करने का प्रयास किया जा रहा है कि शिकायतकर्ता “आदतन शिकायतकर्ता” है।
अब सवाल यह है कि क्या किसी नागरिक द्वारा बार-बार शिकायत करना उसे अपराधी बना देता है? यदि किसी शिकायत में तथ्य नहीं हैं तो उसकी जांच कर तथ्यात्मक निराकरण किया जाना चाहिए। केवल शिकायतकर्ता के बार-बार शिकायत करने के आधार पर शिकायत बंद करना पारदर्शी शिकायत निवारण व्यवस्था की भावना पर सवाल खड़े करता है।
इस मामले में सीईओ को फोन के माध्यम से संपर्क किया गया है लेकिन उनके द्वारा काल रिसीव नहीं किया गया है















