कानून किसके लिए? मरवाही रेंज में पेंड्रा रेंजर की ‘दखलअंदाज़ी’, अवैध वसूली का खेल बेनकाब..?

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही : जिले में जंगल नहीं, अब भ्रष्टाचार बेलगाम नजर आ रहा है। मरवाही वन मंडल में जो हो रहा है, वह किसी प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि सिस्टम के भीतर पल रहा भ्रष्ट खेल प्रतीत होता है। ताज़ा मामला पेंड्रा वन परिक्षेत्र अधिकारी से जुड़ा है, जिन पर अपना रेंज छोड़कर मरवाही रेंज में घुसकर अवैध वसूली करने के गंभीर आरोप लगे हैं। सूत्रों के अनुसार पेंड्रा रेंजर नियम-कानून को ताक पर रखकर मरवाही रेंज के गांवों में जबरन दखल दे रहे हैं और ट्रैक्टर संचालकों व वन तस्करों से खुलेआम अवैध वसूली कर रहे हैं। न कोई लिखित आदेश, न कोई अधिकार—फिर भी रेंजर की दबंग मौजूदगी से पूरा इलाका सहमा हुआ है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि मरवाही रेंज के निचले स्तर के कर्मचारी इस अवैध खेल से डर और मानसिक दबाव में जी रहे हैं। उन्हें आशंका है कि बाहरी रेंज के अधिकारी की करतूतों का ठीकरा कहीं उनके सिर न फूट जाए। रेंजर की वसूली की भनक वन रक्षकों को तब लगती है, जब ग्रामीण आक्रोशित होकर उन पर सवाल खड़े करते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध वसूली का विरोध करने पर उन्हें अप्रत्यक्ष धमकियों का सामना करना पड़ता है। वहीं, गुस्से का शिकार वन रक्षक बनते हैं, जिनका इस वसूली से कोई लेना-देना तक नहीं होता। यह हालात वन विभाग की कार्य पर सीधा कलंक है। सूत्रों का दावा है कि पेंड्रा रेंजर की अवैध वसूली के शिकार लोगों की सूची और उनके बयान मौजूद हैं, जो कभी भी सामने आ सकते हैं। सवाल यह नहीं है कि आरोप सही हैं या नहीं सवाल यह है कि अब तक विभागीय अधिकारी चुप क्यों हैं? क्या मरवाही वन मंडल में रेंजरों को दूसरे रेंज में जाकर वसूली करने की खुली छूट मिल चुकी है? क्या वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले से अनजान बने रहेंगे? या फिर हमेशा की तरह यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा? अगर समय रहते सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ है कि मरवाही वन मंडल में जंगल नहीं, भ्रष्टाचार की जड़ें और गहरी होंगी।





