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कोरबा कलेक्टर अजीत कुमार बसंत पर लगे कई गंभीर अरोपों की आंच मे राजनीति गलियारे में गरमाए सियासी सत्ता- पूर्व गृहमंत्री खुद उतरे मैदान मे..?

पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर उतरे मैदान में, पत्रकारों व नागरिकों के उत्पीड़न के आरोप गरमाए सियासी माहौल

मिथलेश आयम, रायपुर/कोरबा। कोरबा कलेक्टर अजीत कुमार बसंत एक बड़े विवाद में फंस गए हैं। उन पर पद और शक्ति के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार, नागरिकों व पत्रकारों के उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं। इन आरोपों को लेकर अब विरोध की लहर तेज हो गई है। 4 अक्टूबर, 2025 को रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास के सामने धरना प्रदर्शन का ऐलान किया गया है। धरना आयोजकों का कहना है कि कलेक्टर को तत्काल हटाने और उनके दो साल के कार्यकाल की निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी। आरोप लगाने वालों ने दावा किया है कि कलेक्टर बसंत ने नागरिकों को धमकाया, संपत्ति जब्त करना और घरों को ध्वस्त करना शामिल है। साथ ही यह भी आरोप है कि भारत के संविधान द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रहे है। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब राज्य के पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता ननकीराम कंवर भी कलेक्टर के खिलाफ खुलकर सामने आए। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की। कंवर ने एक घटना का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कलेक्टर पर वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के प्रति असम्मानजनक व्यवहार का आरोप लगाया। पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार के मामले भी सामने आए हैं। आरोप है कि पत्रकारों को धमकाया गया, मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उनके खिलाफ बिना सबूत कार्रवाई की धमकी दी गई। कुछ पत्रकारों के घरों की तोड़फोड़ और सामान जब्त करने की शिकायतें भी सामने आई हैं। धरना प्रदर्शन के आयोजकों ने चेतावनी दी है कि यदि कलेक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो “सड़क की लड़ाई” लड़ी जाएगी। उनका कहना है कि यह आंदोलन अभी शुरुआत है, और समय के साथ “भ्रष्टाचार की परतें दर परतें खुलेंगी।” उन्होंने विश्वास जताया कि “मां दुर्गा अवश्य न्याय दिलाएंगी।” इस पूरे मामले ने न केवल कोरबा बल्कि रायपुर तक सियासी हलचल मचा दी है। अब सबकी नजर 4 अक्टूबर को होने वाले प्रस्तावित धरने पर टिकी है।

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