श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया — सरस्वती शिशु मंदिर गौरेला में हुआ भव्य आयोजन

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया — सरस्वती शिशु मंदिर गौरेला में हुआ भव्य आयोजन
गौरेला। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के पावन अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर गौरेला में प्रतिवर्ष की परंपरा का निर्वहन करते हुए रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। राधा–कृष्ण बनो प्रतियोगिता, मटकी फोड़ प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगरपालिका परिषद गौरेला की उपाध्यक्ष रोशनी शर्मा रहीं, जबकि अध्यक्षता समिति की कोषाध्यक्ष दुर्गा गुप्ता ने की। इस अवसर पर विद्यालय संचालन समिति के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के जिला मंत्री बालकृष्ण अग्रवाल तथा सह व्यवस्थापक उमेश अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं भगवान श्रीकृष्ण के तैलचित्र के पूजन से हुआ। नन्हें-मुन्ने बच्चों ने राधा–कृष्ण की वेशभूषा में आकर्षक प्रस्तुतियां देकर सबका मन मोह लिया।
अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि रोशनी शर्मा ने कहा—
“भगवान राम ने हमें मर्यादा का पालन करना सिखाया तो भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म और कर्तव्य का गहन ज्ञान दिया। सरस्वती शिशु मंदिर हमारी परंपराओं और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।”
अध्यक्ष दुर्गा गुप्ता और विशिष्ट अतिथि बालकृष्ण अग्रवाल ने भी सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं और विद्यालय परिवार की सराहना की।
प्रतियोगिता में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। परिणाम इस प्रकार रहे—
राधा बनो प्रतियोगिता: प्रथम – आयुषी नामदेव, द्वितीय – रिमांशी पनिका, तृतीय – नूपुर राठौर।
कृष्ण बनो प्रतियोगिता: प्रथम – मधुसूदन राठौर, द्वितीय – भावेश चक्रधारी एवं आर्या राठौर, तृतीय – आयुष्मान मेहता।
कार्यक्रम का संचालन आचार्य कमलेश पुरी ने किया तथा आभार प्रदर्शन प्रधानाचार्य रामप्रसाद तिवारी ने किया। निर्णायक मंडल में दिव्या दुबे, अनिता बाली एवं जया राठौर सम्मिलित रहीं।
इस अवसर पर भाजपा के जिला मीडिया सह प्रभारी तापस शर्मा, डा. अनुराधा विश्वास, पूर्व प्रधानाचार्य रामरतन राठौर, शंकर सोनी, निलेश नामदेव, अजय मेहता सहित अनेक अभिभावक और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की सराहना करते हुए सभी अतिथियों ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों के व्यक्तित्व विकास एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण साबित होते हैं।





