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उल्टा चोर कोतवाल को डांटे – रेत माफिया की झूठी शिकायत का पर्दाफाश, समाजसेवी ने पुलिस अधीक्षक से की जांच की मांग

जीशान अंसारी की रिपोर्ट, बेलगहना/बिलासपुर। अरपा बचाओ अभियान के तहत अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रहे समाजसेवी और अधिवक्ता सचिन साहू को ही अब रेत माफिया झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। करहीकछार निवासी संजय यादव ने साहू पर रायल्टी पर्ची छीनकर फाड़ने, गुंडागर्दी और अवैध वसूली जैसे आरोप लगाते हुए कलेक्टर व एसपी को शिकायत पत्र सौंपा था।लेकिन, साहू ने स्वयं पुलिस अधीक्षक बिलासपुर से मुलाकात कर इस शिकायत को झूठा और निराधार बताया तथा संजय यादव और उसके साथियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की।

घटनाक्रम का पूरा ब्यौरा

साहू ने अपने आवेदन में लिखा है कि :- 

07 सितंबर 2025 को कोनचरा रोड पर अवैध रेत परिवहन कर रहे दो ट्रैक्टरों को ग्रामीणों व सहयोगियों की मदद से रोका गया और सूचना पर चौकी प्रभारी बेलगहना ने वाहनों को जप्त कर थाने लाया

08 सितंबर 2025 को नगदहरा (नगोई पंचायत) के पास 5-6 हाईवा और एक भरा हुआ हाईवा रेत के साथ पकड़ा गया। मौके पर चैनमाउंटेन से अवैध उत्खनन भी ग्रामीणों व मीडिया के सामने उजागर हुआ।

खनिज निरीक्षक यादव की मौजूदगी में रात 10:30 बजे तक चैनमाउंटेन और हाईवा की जप्ती की गई और पंचनामा तैयार किया गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान संजय यादव मौके पर मौजूद ही नहीं थे।

ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी :- 

घटना स्थल पर 300 से 400 ग्रामीण, जनपद सदस्य परमेश्वर पैकरा, नगपुरा सरपंच, अजय पैकरा सहित कई लोग उपस्थित थे। साथ ही समय न्यूज के संभागीय ब्यूरो चीफ रविराज रजक और अंतिम तक न्यूज के जिसान अंसारी ने भी पूरे घटनाक्रम को कवर किया और समाचार प्रसारित किए।

समाजसेवी का पक्ष, सचिन साहू ने कहा कि –

“मेरे खिलाफ रेत माफिया बार-बार झूठी शिकायतें कर रहा है। पूर्व में भी मुझे झूठे मामलों, यहाँ तक कि अत्याचार अधिनियम (SC/ST Act) में फंसाने की कोशिश की गई थी। यह सब मेरी छवि धूमिल करने और आंदोलन को दबाने की चाल है। लेकिन मैं पीछे हटने वाला नहीं हूँ।”उन्होंने कहा कि अवैध रेत खनन की जानकारी देने और रोकने का काम वे वर्ष 2016 से लगातार प्रशासन और जनता के सहयोग से करते आ रहे हैं।

अब प्रशासन पर टिकी निगाहें :- 

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने भी इस झूठी शिकायत का विरोध किया है और रेत माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन अवैध रेत कारोबार को संरक्षण देने वालों पर नकेल कसता है या आंदोलनकारी समाजसेवी की आवाज दबाने की कोशिश करता है।

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