
“छेड़छाड़ के आरोपी प्राचार्य ने अब अफसरों पर कसा तंज, अभद्र चैट वायरल”
बिलासपुर, 8 सितंबर 2025,जोगीपुर हाई स्कूल के प्रभारी प्राचार्य मनीष वर्मा लगातार विवादों में फंसते जा रहे हैं। पहले से ही छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामलों में आरोपी प्राचार्य अब एक नए विवाद में उलझ गए हैं। उनका एक कथित व्हाट्सएप चैट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने जिले के कलेक्टर, एसपी और आईजी जैसे शीर्ष अधिकारियों को लेकर बेहद अभद्र टिप्पणी की है।
अफसरों को “चोर” कहकर भड़के शिक्षक
मनीष वर्मा ने शिक्षकों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में लिखे संदेश में वरिष्ठ अधिकारियों को “चोर” तक कह डाला। जैसे ही यह मैसेज ग्रुप से बाहर निकला और स्क्रीनशॉट वायरल हुआ, शिक्षकों और अफसरों में गुस्सा फूट पड़ा। इसे शिक्षा जगत की साख पर धब्बा बताते हुए शिक्षकों ने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
पहले से ही विवादों से घिरे रहे प्राचार्य
यह पहली बार नहीं है जब मनीष वर्मा चर्चा में आए हों। महिला व्याख्याता से छेड़छाड़ का मामला – स्कूल की एक महिला व्याख्याता ने उन पर गलत हरकत का आरोप लगाया था। पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और विभागीय जांच शुरू हुई। हालांकि उन्हें अग्रिम जमानत मिल गई थी। छात्रा से छेड़छाड़ – इसके बाद एक छात्रा ने भी उन पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। इस मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ, जो अभी न्यायालय में लंबित है।
शिक्षिकाओं पर अभद्र टिप्पणी – सूत्रों का कहना है कि वर्मा पहले भी शिक्षिकाओं को लेकर आपत्तिजनक मैसेज लिख चुके हैं। तब शिक्षकों ने ग्रुप एडमिन से शिकायत कर उन्हें हटाने की मांग की थी, लेकिन सख्त कार्रवाई नहीं हो पाई।
अब जब मामला जिले के शीर्ष अधिकारियों तक पहुंच गया है, शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन दोनों ने गंभीरता से इसका संज्ञान लिया है। सूत्रों के मुताबिक, जिला प्रशासन इस पूरे प्रकरण की जांच करवा रहा है और विभागीय स्तर पर भी फाइल खोली जा चुकी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में वर्मा के खिलाफ निलंबन से लेकर कानूनी कार्रवाई तक हो सकती है।
शिक्षकों का कहना है कि ऐसे विवादित व्यक्ति को स्कूल जैसी पवित्र संस्था की जिम्मेदारी देना ही शिक्षा जगत की साख को नुकसान पहुंचा रहा है। लगातार हो रहे विवाद और आरोप विभाग की छवि धूमिल कर रहे हैं। कई शिक्षकों ने मांग की है कि वर्मा को तुरंत हटाकर किसी ईमानदार और साफ-सुथरी छवि वाले अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाए।





