“गरीब बोले-पूरा राशन दो, डीलर बोला-जहां जाना है जाओ” चुरेली में डीलर की दबंगई, पंचायत सचिव ने मीडिया से मोड़ा मुंह

जीशान अंसारी की रिपोर्ट, बिलासपुर : जिले के कोटा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चुरेली (केंदा-चुरेली) में सामने आया राशन वितरण का मामला अब जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है। ग्रामीणों के आरोप बेहद गंभीर हैं केवाईसी पूर्ण होने के बाद भी पात्र हितग्राहियों को पूरा राशन नहीं दिया गया। यह सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन है और इसकी जिम्मेदारी सोसाइटी डीलर पर तय होती है। डीलर का व्यवहार और बयान यह बताने के लिए काफी है कि गरीबों के हक को मजाक समझा जा रहा है। “लेना है तो लो, नहीं तो मत लो” यह भाषा न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि सरकारी योजना के उद्देश्यों के खिलाफ भी है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में ऐसी तानाशाही किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। पंचायत सचिव की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों के मुताबिक वे अक्सर पंचायत में मौजूद नहीं रहते, और जब उनसे जवाब मांगा गया तो गोलमोल बातें कर मीडिया को बाइट देने से साफ इनकार कर दिया गया। यह चुप्पी अपने-आप में बहुत कुछ कहती है। अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक है, तो जवाब से परहेज क्यों? हालांकि, इस पूरे मामले में प्रशासन से ग्रामीणों को अब भी उम्मीद है। कोटा विकासखंड और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे। शासन की योजनाएं गरीबों तक पहुंचे यह प्रशासन की प्राथमिकता रही है और इस मामले में भी प्रशासनिक सख्ती से ही व्यवस्था में सुधार संभव है। अब वक्त आ गया है कि सोसाइटी डीलर और लापरवाह पंचायत सचिव पर उचित जाँच कर कार्रवाई की मांग किए है गरीबों के हक से खिलवाड़ करने वालों के लिए सिस्टम में कोई जगह नहीं। प्रशासन यदि सख्ती दिखाता है, तो जनता का भरोसा और मजबूत होगा।





