ग्रामीणों का सीधा आरोप – सूचना देने पर अधिकारी माफियाओं को पहले ही कर देते हैं सतर्क” नगदहरा में अरपा नदी से अवैध रेत उत्खनन का पर्दाफाश, प्रशासन पर उठे सवाल

“ग्रामीणों का सीधा आरोप – सूचना देने पर अधिकारी माफियाओं को पहले ही कर देते हैं सतर्क”
नगदहरा में अरपा नदी से अवैध रेत उत्खनन का पर्दाफाश, प्रशासन पर उठे सवाल
बाईट – राजू यादव
बेलगहना। नगोई के पास नगदहरा ग्राम में अरपा नदी से अवैध रेत उत्खनन का खुलासा होने के बाद प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। शनिवार शाम समाजसेवी सचिन साहू ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुँचे तो नदी के बीचोंबीच चैन माउंटेन मशीन से रेत निकाली जा रही थी। ग्रामीणों के पहुँचते ही वाहन चालक गाड़ियां लेकर भाग निकले।

ग्रामीणों का आरोप है कि यह धंधा लंबे समय से प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा है और शिकायत के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।

ग्रामीणों और महिलाओं का आक्रोश…?
माइनिंग विभाग के अधिकारी मौके पर पहुँचे तो उन्होंने गाड़ियों को खाली बताकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की। इस पर ग्रामीण महिलाओं ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा –
“हमारी आंखों के सामने मशीन से रेत निकाली जा रही थी और गाड़ियां भरी हुई थीं। अधिकारी कहते हैं गाड़ियां खाली थीं। दरअसल, अधिकारी शिकायत मिलते ही रेत माफियाओं को सूचना दे देते हैं।”
सूचना पर भी माफिया सतर्क क्यों….?
ग्रामीणों ने खुलकर कहा कि पुलिस और विभागीय अधिकारी खुद माफियाओं को पहले ही खबर कर देते हैं।
“जैसे ही हम शिकायत करते हैं, तुरंत गाड़ियां खाली करा दी जाती हैं और फिर अधिकारी मौके पर आकर कहते हैं कि कोई साक्ष्य नहीं मिला। यही कारण है कि खनन माफिया खुलेआम नदी की रेत लूट रहे हैं।”
राजनीतिक दबाव और अधिकारियों की मिलीभगत
समाजसेवी सचिन साहू ने आरोप लगाया –
“यह धंधा राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं है। प्रतिदिन लाखों-करोड़ों का रेत कारोबार चल रहा है। अगर प्रशासन ईमानदारी से चाहे तो यह खेल एक दिन में बंद हो सकता है।प्रशासन की सफाई, लेकिन सवाल बरकरार
माइनिंग इंस्पेक्टर राजू यादव ने बताया कि मौके से एक चैन माउंटेन जब्त किया गया और एक हाइवा खाली मिली। वहीं, एसडीएम कोटा ने जांच और कार्रवाई की बात कही।
लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जांच के नाम पर हमेशा लीपापोती होती है और माफियाओं को बचाने का काम किया जाता है। यही वजह है कि वर्षों से यह कारोबार बदस्तूर जारी है।

सीमा पार रेत का खेल
ग्रामीणों ने बताया कि खोंगसरा और टाटीधार मार्ग से रोज़ सैकड़ों ट्रैक्टर-हाइवा रेत लेकर मध्यप्रदेश भेजे जाते हैं। सीमा पर लगे बैरियर में कर्मचारियों की मिलीभगत से यह कारोबार आसानी से चलता है।





