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घोटाले की दो तस्वीरें: सक्ती में फर्जीवाड़ा सचिव सस्पेंड, मरवाही में सिस्टम ही बना सवाल !

घोटाले की दो तस्वीरें: सक्ती में फर्जीवाड़ा सचिव सस्पेंड, मरवाही में सिस्टम ही बना सवाल!

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही/सक्ती। प्रदेश में पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में एक ओर सक्ती जिले में फर्जी गुणवत्ता प्रमाणपत्र के सहारे भुगतान निकालने का मामला उजागर हुआ है, वहीं दूसरी ओर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही जनपद में ‘जांच और भुगतान’ की दोहरी भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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सक्ती में फर्जी सर्टिफिकेट से भुगतान, सचिव निलंबित

सक्ती जिले के जनपद पंचायत जैजैपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत पिसौद में डीएमएफ मद से बने सीसी रोड निर्माण में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। निर्माण कार्य के बाद कागजों में गुणवत्ता प्रमाणपत्र लगाकर भुगतान प्राप्त कर लिया गया, जबकि जांच में कार्य पूरी तरह गुणवत्ताविहीन पाया गया।

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जिला पंचायत सीईओ वासु जैन के निरीक्षण और जांच में यह खुलासा हुआ कि गुणवत्ता प्रमाणपत्र कूट रचित (फर्जी) था। अनुविभागीय अधिकारी द्वारा 10 अप्रैल 2026 को किए गए निरीक्षण में भी सड़क की हालत खराब पाई गई। मामले को गंभीर मानते हुए पंचायत सचिव लीला कमलेश को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

मरवाही में ‘जांच भी, भुगतान भी’—प्रणाली पर उठे सवाल…!

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इसी बीच गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के जनपद पंचायत मरवाही में 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग को लेकर एक अलग तरह की व्यवस्था चर्चा में है। यहां सूत्रों के अनुसार पंचायत इंस्पेक्टर शिव प्रसाद मरकाम को प्रस्तावों की जांच के साथ-साथ डीएससी के माध्यम से भुगतान स्वीकृति की जिम्मेदारी भी दी गई है।

इस दोहरी भूमिका ने पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि जब जांच और भुगतान दोनों का अधिकार एक ही व्यक्ति के पास हो, तो जांच की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। कुछ सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि कथित रूप से पंचायत सचिवों से मिलीभगत कर अनुकूल जांच रिपोर्ट तैयार की जाती है, जिससे भुगतान में आसानी हो जाती है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्रशासन पर उठे बड़े सवाल…..!

दोनों मामलों ने पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की गुणवत्ता, निगरानी और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे भुगतान का मामला सामने आ चुका है, वहीं दूसरी ओर मरवाही में व्यवस्था को लेकर संदेह गहराता जा रहा है। अब जरूरत है कि संबंधित जिलों में उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

“जीपीएम जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे” ने मामले पर तीखा रुख अपनाते हुए साफ कहा कि “खुद भुगतान करो और खुद ही जांच भी करो” जैसी व्यवस्था पूरी तरह गलत और संदिग्ध है। उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसे सिस्टम में निष्पक्षता की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती और यह सीधे-सीधे पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।

सीईओ ने माना कि कर्मचारियों की कमी के चलते ऐसी स्थिति बनती है, लेकिन इसे किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी ने जानबूझकर गलत या गुमराह करने वाली जांच रिपोर्ट तैयार की, तो उस पर कड़ी कार्रवाई तय है।

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