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मंत्री के बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग का आदेश चर्चा में, झोलाछापों की पहचान कर कार्रवाई के निर्देश

मंत्री के बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग का आदेश चर्चा में, झोलाछापों की पहचान कर कार्रवाई के निर्देश

मंत्री बोले- जिले में कोई झोलाछाप नहीं, विभाग का आदेश- पहचान कर कार्रवाई करो

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बिलासपुर में स्वास्थ्य मंत्री के बयान के बाद अब विभाग का पत्र चर्चा में, BMO को अवैध रूप से झोलाछाप डॉक्टरी करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश

बिलासपुर/कोटा।बिलासपुर जिले में झोलाछाप डॉक्टरों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री का पुराना बयान अब स्वास्थ्य विभाग के ताजा आदेश के बाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। बिलासपुर प्रवास के दौरान मीडिया द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों का मुद्दा उठाए जाने पर *स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि जिले में कोई झोलाछाप डॉक्टर नहीं है और ऐसी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।* शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं अब स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक पत्र में कोटा विकासखंड में अवैध रूप से झोलाछाप डॉक्टरी करने वाले व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमित एवं प्रभावी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। यही विरोधाभास अब सवाल खड़े कर रहा है कि जब जिले में झोलाछाप डॉक्टर हैं ही नहीं, तो स्वास्थ्य विभाग को उनकी पहचान कर कार्रवाई करने का आदेश क्यों जारी करना पड़ा?

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*17 अगस्त को CMHO ने जारी किया आदेश*

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मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बिलासपुर कार्यालय से 17 अगस्त 2026 को पत्र क्रमांक 5810 जारी किया गया है। यह पत्र खंड चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोटा के नाम जारी हुआ है।

पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि कोटा विकासखंड में अवैध रूप से झोलाछाप डॉक्टरी करने वाले व्यक्तियों की पहचान कर उन पर नियमित एवं प्रभावी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाए। कार्रवाई के दौरान आवश्यकता अनुसार स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस का सहयोग लेने के निर्देश भी दिए गए हैं।पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी बिलासपुर, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कोटा तथा थाना प्रभारी कोटा को भी भेजी गई है। इससे संकेत मिलता है कि मामला अब केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासन और पुलिस के समन्वय से कार्रवाई करने की तैयारी है।

*पिछले दो माह से चल रहा अभियान*

कोटा विकासखंड में कथित झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग द्वारा पिछले करीब दो माह से अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आ रही है। इस दौरान कई स्थानों पर निरीक्षण किए गए हैं। संबंधित लोगों को समझाइश देने के साथ नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद कुछ स्थानों पर कथित रूप से इलाज का काम जारी रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

हाल ही में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा गांव-गांव पहुंचकर क्लीनिकों का निरीक्षण और कार्रवाई की गई। बेहरामुड़ा में एक क्लीनिक सील किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में विभाग के ताजा आदेश से स्पष्ट है कि कार्रवाई को अब और प्रभावी बनाने की तैयारी की जा रही है।मंत्री के बयान से क्यों जुड़ रहा है आदेश?*

दरअसल, बिलासपुर प्रवास के दौरान जब मीडिया ने स्वास्थ्य मंत्री के सामने झोलाछाप डॉक्टरों का मुद्दा उठाया था, तब मंत्री की ओर से कहा गया था कि जिले में कोई झोलाछाप डॉक्टर नहीं है और शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

अब उसी जिले के स्वास्थ्य विभाग द्वारा आधिकारिक रूप से BMO को पत्र लिखकर ‘अवैध रूप से झोलाछाप डॉक्टरी करने वाले व्यक्तियों की पहचान’ करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाने से मंत्री के बयान और विभागीय आदेश के बीच अंतर दिखाई दे रहा है।

यही वजह है कि यह आदेश अब चर्चा का विषय बन गया है।

 

*हर दूसरे दिन सामने आ रही खबरें*

ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों की गतिविधियों को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित हो रही हैं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में लोग कई बार आसानी से उपलब्ध होने और कम खर्च के कारण ऐसे कथित चिकित्सकों के पास इलाज कराने पहुंच जाते हैं।

स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने के साथ-साथ ग्रामीणों को जागरूक करना भी है, ताकि गंभीर बीमारी की स्थिति में लोग योग्य चिकित्सक या सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में ही उपचार कराएं।

मलेरिया के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता*

कोटा क्षेत्र में मलेरिया के लगातार मामले सामने आने के बीच झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है। स्वास्थ्य विभाग को आशंका है कि बिना पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता के इलाज किए जाने से बीमारी की सही पहचान और उपचार में देरी हो सकती है।मलेरिया जैसी बीमारी में समय पर जांच और उचित उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अवैध रूप से चिकित्सा करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश को स्वास्थ्य व्यवस्था की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब सवाल कार्रवाई की गति और दायरे का*

स्वास्थ्य विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट तौर पर पहचान, निगरानी और प्रभावी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही जरूरत पड़ने पर पुलिस और स्थानीय प्रशासन की मदद लेने को भी कहा गया है।अब सवाल यह है कि इस आदेश के बाद कोटा विकासखंड में कितने ऐसे लोगों की पहचान होती है और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है?

सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जब स्वास्थ्य मंत्री कह चुके हैं कि जिले में कोई झोलाछाप डॉक्टर नहीं है, तो स्वास्थ्य विभाग का यह आधिकारिक आदेश किन लोगों की पहचान और कार्रवाई के लिए जारी किया गया है?

फिलहाल स्वास्थ्य मंत्री के बयान और स्वास्थ्य विभाग के इस आदेश के बीच का यही विरोधाभास बिलासपुर जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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